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रिद्धि सिद्धि कॉलोनी के प्लेटिनम पार्क में हाईटेक रामलीला का भव्य शुभारंभ

पहले दिन रावण-नंदी संवाद और नारद प्रसंग से जगी भक्ति की लहर

मुख्य बिंदु
  • रिद्धि सिद्धि कॉलोनी प्रथम स्थित प्लेटिनम पार्क में श्री रामलीला सेवा समिति के तत्वावधान में हाईटेक रामलीला का रविवार रात भव्य शुभारंभ हो गया।
  • मुख्य अतिथि समाजसेवी भगवानदास पाहूजा, विशिष्ट अतिथि तरुण बंसल और भूषण गोयल ने विधिवत रूप से दीप प्रज्वलित कर रामलीला का उद्घाटन किया।
  • कार्यक्रम की शुरुआत में ही भारी संख्या में दर्शक पहुंचे और हाईटेक मंचन को देखकर उत्साहित दिखे।
  • श्री रामलीला सेवा समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि पहले दिन का मंचन रावण और नंदीगण के संवाद से आरंभ हुआ।
  • इस प्रसंग में भगवान शिव की महिमा और रावण के अहंकार को अत्यंत प्रभावी ढंग से दर्शाया गया।
  • मंच पर रावण अपने दरबार में अपनी शक्तियों का बखान करते दिखे।
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रिद्धि सिद्धि कॉलोनी के प्लेटिनम पार्क में हाईटेक रामलीला का भव्य शुभारंभ

श्रीगंगानगर। रिद्धि सिद्धि कॉलोनी प्रथम स्थित प्लेटिनम पार्क में श्री रामलीला सेवा समिति के तत्वावधान में हाईटेक रामलीला का रविवार रात भव्य शुभारंभ हो गया। मुख्य अतिथि समाजसेवी भगवानदास पाहूजा, विशिष्ट अतिथि तरुण बंसल और भूषण गोयल ने विधिवत रूप से दीप प्रज्वलित कर रामलीला का उद्घाटन किया। कार्यक्रम की शुरुआत में ही भारी संख्या में दर्शक पहुंचे और हाईटेक मंचन को देखकर उत्साहित दिखे।

श्री रामलीला सेवा समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि पहले दिन का मंचन रावण और नंदीगण के संवाद से आरंभ हुआ। इस प्रसंग में भगवान शिव की महिमा और रावण के अहंकार को अत्यंत प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। मंच पर रावण अपने दरबार में अपनी शक्तियों का बखान करते दिखे। उन्होंने वायु, अग्नि, वरुण, सूर्य और काल तक को अपने इशारों पर चलने का दावा किया।

नट-नटी संवाद से धर्म-मर्यादा का संदेश समिति के सचिव दिनेश शर्मा ने बताया कि मंचन से पहले नट-नटी के संवाद में भगवान के अनेक नामों और अवतारों का महत्व बताया गया।

नटी के प्रश्न पर नट ने समझाया कि भगवान जन्म-मरण से रहित हैं, फिर भी दुष्टों के नाश और भक्तों के कल्याण के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने कहा कि रामलीला के माध्यम से धर्म-मर्यादा की पहचान होती है और जनता को उपदेश मिलता है।

नटी के सुझाव पर आज की प्रस्तुति में रामावतार की लीलाओं को संक्षेप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया।

नारद मुनि की तपस्या और कामदेव का प्रयास निर्देशक सुभेष देहडान ने बताया कि एक अन्य महत्वपूर्ण प्रसंग में नारद मुनि हिमालय की गुफा में भगवान नारायण का ध्यान लगाए दिखे।

इंद्र ने कामदेव को उनकी तपस्या भंग करने के लिए भेजा। कामदेव ने अप्सराओं के साथ गान-नृत्य और माया रचकर ध्यान भंग करने की कोशिश की, लेकिन नारद पर कोई असर नहीं हुआ।

अंत में कामदेव क्षमा मांगते हुए चले गए। नारद ने इसे अपनी विजय मानकर शिवजी को बताया।पहले दिन रामायण के और भी अनेक प्रसंगों का मंचन किया गया।

हाईटेक तकनीक, प्रभावी संवाद और भक्तिमय प्रस्तुति से पहला दिन दर्शकों के लिए यादगार रहा।

भव्य मंच, व्यवस्थित बैठक और लाइव स्ट्रीमिंग इस बार मंच और भी ज्यादा भव्य, आकर्षक तथा हाईटेक तैयार किया गया है। आईटी टीम रामलीला का सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीमिंग कर रही है, ताकि दूर बैठे श्रद्धालु भी प्रस्तुति का आनंद ले सकें।

दर्शकों के बैठने की व्यवस्था इस बार भी बहुत व्यवस्थित की गई है, ताकि किसी को भी रामलीला देखने में परेशानी न हो।उल्लेखनीय है कि इस रामलीला में महिला पात्रों की भूमिकाएं महिला कलाकार ही निभाती हैं।

हमेशा की तरह शिव भगवान सरावगी उद्घोषक की भूमिका निभा रहे हैं।

समिति के संरक्षक कृष्ण गुनेजा और पवन वधवा के मार्गदर्शन में संजय गोयल, गुरमेश धींगडा एडवोकेट, राहुल सालासर, महेश सारस्वत सहित सभी कलाकार, सदस्य और कार्यकर्ता रामलीला के मंचन को सफल बनाने में जुटे हुए हैं।