बाँसवाड़ा। किशनपोल बालमुकुन्द गणेश मण्डल, तेली समाज की वार्षिक आमसभा एवं 17वीं वार्षिक आय-व्यय ब्यौरा पत्रिका का विमोचन समारोह श्री राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में गणपति बप्पा मोरिया के जयकारों के साथ भव्य रूप से सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री नारायणलालजी सलाड़िया, जिलाध्यक्ष तेली समाज रहे।
विशिष्ट अतिथियों में श्री भगवतीलालजी बरोड़िया (इकाई अध्यक्ष, किशनपोल), श्री दिलीपजी तेली (इकाई अध्यक्ष, पृथ्वीगंज), श्री राहुलजी सलाड़िया (इकाई अध्यक्ष, प्रगति नगर), श्री दीपकजी खेरावत (मंदिर समिति अध्यक्ष) एवं श्री अरविन्दजी सलाड़िया (गरबा मण्डल अध्यक्ष) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में समाज के अम्बालालजी राठौड़, शांतिलाल तेली, सुनील तेली, अरविन्द खेरावत, सतीश राठौड़, चिराग सोलंकी, जिग्यांश सोलंकी, दीक्षीत सोलंकी, आदित्य बरोड़िया, पियुष तेली, आदि तेली समाज के सदस्यगण भी बड़़ी संख्या में मौजूद रहे।
गणेशोत्सव की आय-व्यय रिपोर्ट समाज के समक्ष समारोह में गणेशोत्सव 2026 के आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा समाज के समक्ष प्रस्तुत किया गया तथा वार्षिक आय-व्यय रिपोर्ट की मुद्रित पत्रिका का विमोचन किया गया।
मण्डल पदाधिकारियों ने बताया कि गणेशोत्सव सम्पन्न होने के बाद निर्धारित समय में आय-व्यय का ब्यौरा तैयार कर समाज के घर-घर तक पहुंचाने की परम्परा वर्षों से निभाई जा रही है।
मण्डल की यह पहल सामाजिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास का अनुकरणीय उदाहरण है। मण्डल द्वारा बताया गया कि वर्षों से नियमित रूप से आय-व्यय ब्यौरा समाज के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है और आज तक किसी प्रकार की राशि संबंधी त्रुटि सामने नहीं आई है।
मुख्य अतिथि एवं अतिथियों ने मण्डल की कार्यप्रणाली और सामाजिक गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि समाज के लिए समय, श्रम और संसाधन समर्पित कर वर्षों से निरन्तर सेवा करना अपने आप में सराहनीय कार्य है।
18 वर्षों से निरन्तर गणेशोत्सव की भव्य परम्परा बालमुकुन्द गणेश मण्डल की स्थापना लालीवाव मठ के पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर श्रीमहंत हरिओमदासजी महाराज के दिव्य आशीर्वाद से हुई। मण्डल पिछले 18 वर्षों से गणेशोत्सव का आयोजन करता आ रहा है।
मण्डल की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है कि प्रत्येक वर्ष भगवान गणेश की छोटी प्रतिमा स्थापित कर उसके चारों ओर भव्य एवं आकर्षक झांकी का निर्माण किया जाता है। पूज्य गुरुदेव महामण्डलेश्वर श्रीमहंत हरिओमदासजी महाराज के मार्गदर्शन में तैयार होने वाली इन झांकियों में धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक संदेशों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाता है।
इस वर्ष गोवर्धन लीला, पिछले वर्षों में मथुरा जन्मभूमि, अखण्ड भारत, अयोध्या श्रीराम मंदिर मॉडल, कोविड-19, कालिया मर्दन, सागर मंथन, मटकी फोड़, झूला झूले बालमुकुन्द सहित अनेक आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र रही हैं।
मण्डल की विशेषता यह भी है कि बाँसवाड़ा शहर में कम्प्यूटराइज्ड डिजिटल ऑटोमेटिक झांकी के माध्यम से धार्मिक प्रसंगों को जीवंत रूप देने का प्रयास किया जाता है। झांकी में भगवान गणेश की प्रतिमा सामान्यतः 2 से 3 फीट की रहती है, जबकि सजावट एवं तकनीकी प्रस्तुति के बाद पूरी झांकी विशाल एवं आकर्षक स्वरूप ले लेती है। विसर्जन के समय केवल प्रतिमा का ही विसर्जन किया जाता है।
महाप्रसादी एवं प्रतिभा सम्मान समारोह भी आकर्षण का केन्द्र गणेश महोत्सव के दौरान मण्डल द्वारा प्रतिवर्ष समाज की महाप्रसादी एवं प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन भी किया जाता है। इसमें समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित कर युवाओं एवं विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
मण्डल को भारत साधु समाज के महामंत्री एवं महामण्डलेश्वर श्रीमहंत हरिओमदासजी महाराज द्वारा प्रतिवर्ष छोटी गणेश प्रतिमा स्थापित करने का संकल्प भी दिलाया गया है, जिसका मण्डल द्वारा निरन्तर पालन किया जा रहा है।
शाम होते ही उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब गणेश महोत्सव के दौरान प्रतिदिन शाम करीब 6 बजे से बालमुकुन्द दरबार में दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ने लगती है। श्रद्धालु झांकी के दर्शन कर भाव-विभोर होते हैं और बड़ी संख्या में लोग झांकी के साथ सेल्फी लेते हुए भी नजर आते हैं।
मण्डल का संदेश भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केन्द्र है- “यूँ तो रब की हर जगह बात होती है, लेकिन बालमुकुन्द के दरबार में रब से मुलाकात होती है।”
मण्डल का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में एकता, सेवा, संस्कार, सामाजिक सहभागिता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना भी है।
बालमुकुन्द गणेशजी के प्रति श्रद्धा रखने वाले श्रद्धालु अपनी विभिन्न मनोकामनाओं एवं समस्याओं को लेकर दरबार में प्रार्थना करते हैं। मण्डल का विश्वास है कि आस्था, विश्वास और सकारात्मक सोच व्यक्ति के जीवन में आत्मबल का संचार करती है।
पूरे समाज की सहभागिता से बनता है महामहोत्सव 12 दिवसीय गणेश महोत्सव को भव्य रूप देने में तेली समाज के भाई, माताएं, बहनें एवं बच्चे काफी समय पूर्व से तैयारियों में जुट जाते हैं। सामूहिक श्रम, सहयोग और समर्पण के कारण यह आयोजन प्रतिवर्ष धार्मिक उत्सव के साथ-साथ समाज की एकता और सामूहिक शक्ति का उत्सव बन जाता है।
बालमुकुन्द गणेश मण्डल का यह प्रयास समाज में यह संदेश देता है कि जब सेवा, पारदर्शिता, आस्था और सामूहिक सहभागिता एक साथ जुड़ती है, तो एक धार्मिक आयोजन समाज की पहचान और गौरव का पर्व बन जाता है।
