उदयपुर। देवेंद्र धाम स्थित महावीर समवसरण में रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित धर्मसभा में राष्ट्र रक्षा, संस्कृति संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों को लेकर प्रेरणादायी संदेश दिया गया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि राष्ट्र की रक्षा करना ही सर्वाेपरि धर्म है।
प्रत्येक नागरिक को देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए सदैव सजग और जिम्मेदार रहना चाहिए।डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि जिस प्रकार व्यक्ति अपने परिवार की सुरक्षा और समाज के हित को अपना दायित्व समझता है, उसी प्रकार राष्ट्र के प्रति भी कर्तव्यबोध होना आवश्यक है।
राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमाओं का नाम नहीं, बल्कि उसकी पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं, संस्कारों और सामाजिक मूल्यों से होती है।
इन मूल्यों का संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि समय के साथ परिस्थितियां और चुनौतियां बदलती रहती हैं, लेकिन राष्ट्र एवं संस्कृति के प्रति हमारा दायित्व कभी समाप्त नहीं होता।
देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाए रखने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से राष्ट्र के प्रति समर्पण, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया।धर्म और राष्ट्र सेवा को बताया एक-दूसरे का पूरक-डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि धर्म का अर्थ केवल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है।
सच्चा धर्म व्यक्ति को सत्य, सदाचार, सेवा, संयम और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
जब व्यक्ति अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाता है, तभी धर्म का वास्तविक स्वरूप सामने आता है।डॉ.सुरेन्द्र मुनि ने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान विष्णु सहित देवी-देवताओं की आराधना में भी धर्म, समाज और राष्ट्र की रक्षा का भाव निहित रहा है।
हमारी संस्कृति ने हमेशा अन्याय और अधर्म के विरुद्ध खड़े होने तथा सत्य एवं मूल्यों की रक्षा करने की प्रेरणा दी है।सद्भाव और संस्कारों को मजबूत बनाने का आह्वान-उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में धार्मिक संस्कारों को अपनाने के साथ समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव की भावना को बढ़ावा दें।
परिवारों में बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का संस्कार दिया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी देश की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ा सकें।रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल भाई-बहन के स्नेह और रक्षा के संकल्प का प्रतीक नहीं है, बल्कि व्यापक अर्थों में एक-दूसरे की सुरक्षा, समाज की रक्षा और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने डॉ. राजेंद्र मुनि के प्रवचन का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने राष्ट्रहित, सामाजिक सद्भाव, संस्कारों के संरक्षण और देश की एकता-अखंडता को मजबूत बनाने में अपना योगदान देने का संकल्प लिया।
श्रीसंघ अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन ने बताया कि रक्षा बन्धन के अवसर पर श्रीसंघ की ओर से सभी श्रावकों को रक्षासूत्र बांटे गये। उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि ने मंगल भावना प्रस्तुत की।
अंत मे ंमंत्री हिम्मत बड़ाला ने आभार ज्ञापित किया।
