उदयपुर — वीरवर राष्ट्रनायक दुर्गादास जी की 388वीं जयंती के पखवाड़े का समापन आज दवाणा हाउस, एकलिंगपुरा में भव्य समारोह के साथ संपन्न हुआ। आयोजन श्री क्षत्रिय युवक संघ एवं सहयोगियों द्वारा संचालित किया गया और इसमें समाज के गणमान्य नागरिक, धार्मिक-शैक्षिक प्रतिनिधि व युवा वर्ग ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। रा.स्व.से.संघ के महिपाल सिंह राठौड़ ने वीर दुर्गादास के वीर व्यक्तित्व और त्याग से दर्शकों को अवगत कराते हुए कहा कि उनके आदर्श आज के समय में भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि उदयपुर में वीरवर दुर्गादास के नाम पर सड़क और उनकी मूर्ति की स्थापना कर उनके योगदान को स्थायी रूप से यादगार बनाया जाना चाहिए।
डॉ. कमल सिंह बेमला ने दुर्गादास जी के कृतित्व और जीवन चरित्र पर विस्तृत जानकारी दी और उनके साहसिक कार्यों का ऐतिहासिक संक्षेप प्रस्तुत किया। मोती सिंह राठौड़ ने समिति के माध्यम से संगठित व समर्पित कार्य करने के लिए उपस्थितों को प्रेरित किया। संत श्री लक्ष्मण पुरी गोस्वामी ने ओजस्वी व्याख्यान से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और कार्यक्रम में आध्यात्मिक आयाम जोड़ा। कार्यक्रम का संचालन भंवर सिंह बेमला ने कुशलतापूर्वक किया।
समिति द्वारा बेमला गाँव की लोक-विद्यालय का नामकरण वीरवर दुर्गादास के नाम पर करने का प्रस्ताव पारित किया गया, जिसे उपस्थित सदस्यों ने समर्थन दिया। समारोह में मान सिंह, इन्द्र सिंह, भारत सिंह, भंवर सिंह, जितेन्द्र सिंह, रघुवीर सिंह, कृष्णदेव सिंह, भगवान सिंह, ईश्वर सिंह, कमलेन्द्र सिंह, भगत सिंह, देवेन्द्र सिंह, नरपत सिंह, लोकेंद्र सिंह, राजेन्द्र सिंह सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।
दुर्गादास जी की जयंती का यह पखवाड़ा 13 अगस्त से विभिन्न राज्यों व स्थानों पर निरंतर आयोजित किया जा रहा था। उदयपुर संभाग में कार्यक्रम की श्रृंखला में 19 अगस्त को मीरां नगर पार्क, 20 अगस्त को मुछाला महादेव (नाथद्वारा), 21 अगस्त चूण्डा बाग (भूपाल नोबल्स संस्थान परिसर), 22 अगस्त महाराणा प्रताप क्षत्रिय संस्थान भवन (पुरोहितों की मादड़ी), 23 अगस्त शक्तावतो का गुड़ा व टोकर (सेमारी, जिला सलुम्बर), 24 अगस्त श्री क्षत्रिय विकास संस्थान (सेक्टर 13), 25 अगस्त ग्लोबल एकेडमी सेकेंडरी स्कूल (सलुम्बर), 26 अगस्त श्री आशापुरा रिसोर्ट (दलोट, जिला प्रतापगढ़) तथा 27 अगस्त को एकलिंगपुरा, साकारोड़ा व कुराबड़ में कार्यक्रम आयोजित किए गए।
आयोजन के आयोजकों ने कहा कि दुर्गादास जी के जीवन-मूल्यों, वीरता और समाजसेवा को युवाओं तक पहुँचाने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम निरंतर चलेंगे और उनकी याद को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने का प्रयास जारी रहेगा।
