बांसवाड़ा | सम्पूर्ण शारदीय नवरात्रि में अखण्ड मौन रहकर शक्ति उपासना के लिए चिर परिचित बांसवाड़ा के साधक ‘दयालु’ के नाम से प्रसिद्ध पं. नरेशचन्द्र पण्ड्या का नवरात्रिकालीन अखण्ड मौन साधना का व्रत 11 अक्टूबर, रविवार से आरंभ होगा।
इस दौरान् वे मौन पूरी तरह मौन रहेंगे। यह उनका 32वां मौन व्रत अनुष्ठान है। इस वर्ष उनका मौन व्रतानुष्ठान विश्वशान्ति के साथ ही अमरीकी प्रेसीडेंट ट्रम्प के विचारों में मंगलकारी सकारात्मक परिवर्तन और भारत की वैश्विक ख्याति में उत्तरोत्तर अभिवृद्धि के साथ देश में खुशहाली के स्वर्णिम दौर का दिग्दर्शन होने के उद्देश्य से हो रहा है।
पेन-डायरी भेंट
मौनव्रत के दौरान् लेखन के लिए कलम एवं डायरी उनके प्रिय मित्र एवं जाने-माने व्यवसायी हुसैनी भाई लोखण्डवाला ने शनिवार को श्री पीताम्बरा आश्रम में उन्हें भेंट की। हुसैनी भाई ही हर बार नवरात्रिकालीन मौन साधना से पहले दयालु को अपनी ओर से यह भेंट करते रहे हैं। दोस्ती की यह अपने आप में अनूठी मिसाल है।
इस अवसर पर श्री हुसैनी भाई लोखण्डवाला ने मौनव्रती साधक नरेश पण्ड्या को उपरणा पहना कर अभिनन्दन किया और उनकी साधना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ईश्वर उन्हें मौन व्रत की साधना के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों में आशातीत सफलता प्रदान करे।
उन्होंने कहा कि चुप रहना एक गहरी और कठिन साधना है। इससे आत्मा और शरीर को नवीन चेतना और ऊर्जा मिलती है और इससे समाज की सेवा एवं परोपकार के भावों को सम्बल प्राप्त होता है।
इस अवसर पर गायत्री मण्डल के मुख्य संरक्षक दिलीप गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोहर जी. जोशी, कोषाध्यक्ष कथावाचक पं. अनन्त जोशी, सुप्रसिद्ध लोक कवि भागवत कुन्दन, शिक्षाविद् मनोहर एच. जोशी, पं. जय रणा, प्रदीप सोनी ‘बंटी’, वैद्य भरतराज किशोर पाठक(कवि भरत ब्रह्मचारी), पंत्र मनोज भट्ट शास्त्री सहित गायत्री मण्डल के कार्यकर्ता, श्री पीताम्बरा आश्रम के साधक एवं साधिकाएं तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
श्री पीताम्बरा आश्रम में श्री हुसैनी भाई का स्वागत किया गया। उन्होंने परिसरों का अवलोकन किया और प्रसन्नता जाहिर करते हुए सुकूनदायी धाम बताया।
पं. नरेश पण्ड्या ने बताया कि मौन व्रत धारण की पूर्व संध्या पर शिक्षाविद् मोहम्मद रफी जमान, प्रमुख व्यवसायी रजाउद्दीन शेख, शंकरलाल मईड़ा, कुरबान बेलिम, विजयलाल मईड़ा सहित सभी क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों की शुभकामनाएं उन्हें प्राप्त हुई हैं।
इन्द्रधनुषी व्यक्तित्व के धनी हैं दयालु
मूलतः बांसवाड़ा जिले के तलवाड़ा गांव निवासी पं. नरेश पण्ड्या का हर वर्ष नवरात्रि में मौन रहकर साधना करने का व्रत पिछली 31 नवरात्रियों से जारी है।
उनका व्यक्तित्व कई खूबियों से भरा होने के कारण हमेशा चर्चित रहा है। दयालु का रूप-रंग और परिधान आदि सब कुछ वार से हिसाब से है। हर वार को उनकी वेशभूषा अलग-अलग रंगों से सजी रहती है। कान में पहनी कड़ी से लेकर घड़ी, रूमाल और परिधान भी वार के हिसाब से उसी एक रंग के पहनते हैं। उनके स्कूटर का रंग भी केसरिया ही है जो कि जिले भर में सबसे अलग ही दिखता है।
चन्दन इत्र के शौकीन पं. नरेश पण्ड्या का आस-पास का सारा परिवेश भी महकता हुआ सुकून देता रहता है। मौन व्रती के रूप में लोकप्रिय, गले एवं कलाई में कई प्रकार की मालाएं धारण करने वाले तिलकधारी पं. नरेश पण्ड्या ‘दयालु’ का आकर्षक व्यक्तित्व ही उनकी धार्मिक-आध्यात्मिक विलक्षणताओं का परिचय देने के लिए काफी है।
पंड्या अच्छे डांसर और एक्टर भी हैं। उन्होंने शिव, नारद, माफिया डान, सिक्युरिटी गार्डन पंडित का किरदार निभाया है। भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में पले बडे़ दयालु ने मौनी बाबा मंगलनाथ वाले के सान्निध्य में होने वाली रामलीला में भी अनेक पात्रों की भूमिका निभाई है। बांसवाड़ा शहर में अम्बेडकर सर्कल. एस.पी. चौराहा पर बरसों तक आयरन से संबंधित व्यवसाय कर चुके पण्ड्या मौन साधना को ईश्वर व माता-पिता का आशीर्वाद मानते हैं।
