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Udaipur News

मेवाड़ की परम्परागत फसलों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

मुख्य बिंदु
  • महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के अंतर्गत राष्ट्रीय कृषि विकास योजना परियोजना के तहत “मेवाड़ की परम्परागत फसलों का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन” विषय पर 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन भीलवाड़ा में किया गया।
  • कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, ग्रामीण महिलाओं एवं युवाओं को परम्परागत फसलों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना था।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए।
  • यादव ने परंपरागत फसलों की कटाई, कटाई उपरांत प्रबंधन एवं भंडारण तकनीकों की जानकारी प्रदान की तथा वैज्ञानिक विधियों को अपनाने पर बल दिया।
  • नगर ने परम्परागत फसलों के प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, उद्यमिता विकास एवं बाजार संभावनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।
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मेवाड़ की परम्परागत फसलों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के अंतर्गत राष्ट्रीय कृषि विकास योजना परियोजना के तहत “मेवाड़ की परम्परागत फसलों का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन” विषय पर 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन भीलवाड़ा में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, ग्रामीण महिलाओं एवं युवाओं को परम्परागत फसलों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना था।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। इस अवसर पर डॉ. सी. एम. यादव ने परंपरागत फसलों की कटाई, कटाई उपरांत प्रबंधन एवं भंडारण तकनीकों की जानकारी प्रदान की तथा वैज्ञानिक विधियों को अपनाने पर बल दिया। वहीं डॉ. के. सी. नगर ने परम्परागत फसलों के प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, उद्यमिता विकास एवं बाजार संभावनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. अंजलि जुयाल ने मूल्य संवर्धित उत्पादों की पैकेजिंग एवं लेबलिंग के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि आकर्षक एवं वैज्ञानिक पैकेजिंग तथा नियमानुसार लेबलिंग उत्पादों की गुणवत्ता, उपभोक्ता विश्वास एवं बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

योगिता पालीवाल (यंग प्रोफेशनल) ने परम्परागत फसलों (हल्दी एवं अदरक)एवं मिलेट्स के मूल्य संवर्धन, पोषणीय महत्व एवं स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रसंस्करण के माध्यम से उत्पादों की गुणवत्ता, शेल्फ लाइफ एवं बाजार मूल्य में वृद्धि की जा सकती है।

उन्होंने विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण एवं उनकी व्यावसायिक संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

मिलेट्स के साथ-साथ हल्दी एवं अदरक के मूल्य संवर्धन पर भी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रतिभागियों को हल्दी एवं अदरक आधारित विभिन्न उत्पादों के निर्माण की व्यावहारिक जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण में हल्दी का अचार, चटनी, मुखवास तथा अदरक की कैंडी, मुरब्बा, शरबत एवं अन्य मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण की विधियाँ सिखाई गईं।

विशेषज्ञों ने बताया कि इन उत्पादों के माध्यम से किसानों एवं ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार एवं अतिरिक्त आय के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

इसके अतिरिक्त सुश्री नम्रता बेनीवाल द्वारा विभिन्न व्यावहारिक सत्रों का संचालन किया गया, जिनमें प्रतिभागियों को बाजरा, ज्वार, रागी एवं अन्य परम्परागत फसलों से मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को बाजरा चॉकलेट, राजगीर चकली, सांवा के स्टिक्स आदि उत्पाद बनाने के बारे में प्रायोगिक सत्र का आयोजन भी किया गया। प्रतिभागियों ने उत्पाद निर्माण, प्रसंस्करण तकनीकों, पैकेजिंग तथा विपणन संबंधी व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों का शैक्षणिक भ्रमण भी आयोजित किया गया।

इस अवसर पर उन्हें सफल उद्यमियों एवं प्रसंस्करण इकाइयों का भ्रमण कराया गया, जहाँ उन्होंने मूल्य संवर्धित उत्पादों के उत्पादन, पैकेजिंग, विपणन एवं व्यवसाय प्रबंधन की प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रतिभागियों को लघु खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने एवं स्वरोजगार के अवसरों के बारे में मार्गदर्शन प्रदान किया।

इस भ्रमण से प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ तथा उद्यमिता के प्रति उनका उत्साह बढ़ा।

कार्यक्रम में उपस्थित किसानों, महिलाओं एवं युवाओं ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें स्वरोजगार एवं आय संवर्धन के नए अवसरों की जानकारी प्राप्त हुई। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए तथा उन्हें अपने क्षेत्रों में प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन आधारित उद्यम स्थापित कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।