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Udaipur News

व्यापार मेला राईटैक्स-2026 के दूसरे दिन विजिटर्स की भीड़ उमड़ी, आज अंतिम दिन मेला

मुख्य बिंदु
  • प्रतिष्ठित औद्योगिक संगठन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से बी.
  • कॉलेज ग्राउण्ड में राजस्थान इंडस्ट्रियल ट्रेड एक्सपो-2026 राइटेक्स में दूसरे दिन विजिटर्स का रैला उमड़ पड़ा।
  • वहां पर लगी लगभग हर स्टॉल्स पर प्रातरु 11 बजे से शाम 8 बजे तक लगातार लोगों का हुजम लगा रहा।
  • पीएचडी चैंबर, उदयपुर संभाग के संयोजक एवं बिजनेस सर्कल इंटरनेशनल (बीसीआई) के फाउंडर एंड चैयरमेन अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष शहरवासियों और आसपास के लोगों में इस एक्स्पो को लेकर रूझान बढ़ा है तथा लोगों में नई-नई जानकारियां एवं नये प्रोडक्ट्स को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।
  • माधवानी ने बताया कि उद्योग एवं वाणिज्य विभाग राजस्थान सरकार द्वारा राइजिंग राजस्थान के तहत एक जिला एक उत्पाद ओड़ीओपी की पॉलिसी के तहत मार्जिन मनी, अनुदान मार्केटिंग, सहायता मानक प्रमाणन, अनुदान टेक्नोलॉजी सॉफ्टवेयर एवं सहायता एवं ब्रांडिंग सपोर्ट के बारे में लोगों ने अधिक से अधिक जानकारियां प्राप्त की।
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व्यापार मेला राईटैक्स-2026 के दूसरे दिन विजिटर्स की भीड़ उमड़ी, आज अंतिम दिन मेला

उदयपुर। प्रतिष्ठित औद्योगिक संगठन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से बी.एन. कॉलेज ग्राउण्ड में राजस्थान इंडस्ट्रियल ट्रेड एक्सपो-2026 राइटेक्स में दूसरे दिन विजिटर्स का रैला उमड़ पड़ा। वहां पर लगी लगभग हर स्टॉल्स पर प्रातरु 11 बजे से शाम 8 बजे तक लगातार लोगों का हुजम लगा रहा।

पीएचडी चैंबर, उदयपुर संभाग के संयोजक एवं बिजनेस सर्कल इंटरनेशनल (बीसीआई) के फाउंडर एंड चैयरमेन अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष शहरवासियों और आसपास के लोगों में इस एक्स्पो को लेकर रूझान बढ़ा है तथा लोगों में नई-नई जानकारियां एवं नये प्रोडक्ट्स को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।

माधवानी ने बताया कि उद्योग एवं वाणिज्य विभाग राजस्थान सरकार द्वारा राइजिंग राजस्थान के तहत एक जिला एक उत्पाद ओड़ीओपी की पॉलिसी के तहत मार्जिन मनी, अनुदान मार्केटिंग, सहायता मानक प्रमाणन, अनुदान टेक्नोलॉजी सॉफ्टवेयर एवं सहायता एवं ब्रांडिंग सपोर्ट के बारे में लोगों ने अधिक से अधिक जानकारियां प्राप्त की।

मार्जिन मनी अनुदान के तहत नवीन सूक्ष्म ऑडियो कि उद्योगों को 25 प्रति.अनुदान अधिकतम 15 लाख रुपए, नवीन लघु ऑडियो कि उद्योगों को 15 प्रतिशत अनुदान अधिकतम 20 लाख रुपए साथ ही महिला एससी एसटी दिव्यांग एवं युवा उद्यमियों को 5 लाख रूपए अतिरिक्त अनुदान के बारे में भी लोगों को जानकारी मिली।

पीएचडी चैंबर के क्षेत्रीय निदेशक आर.के. गुप्ता ने बताया कि मार्केटिंग सहायता के तहत राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मेलों, प्रदर्शनियों में भाग लेने पर 75 प्रतिशत स्टॉल रेंट अनुदान व आवागमन हेतु सहायता के बारे में बताया गया।

मानक प्रमाणन अनुदान के तहत राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मानक परामर्श हेतु खर्चे पर 75 प्रतिशत अधिकतम 3 लाख तक की पुनर्भरण सहायता की जानकारी प्राप्त की।

टेक्नोलॉजी सॉफ्टवेयर सहायता के अंतर्गत राष्ट्रीय संस्थानों से एडवांस टेक्नोलॉजी सॉफ्टवेयर अधिकरण हेतु किए गए पर 50 प्रति. अधिकतम 5 लख रुपए तक की सहायता।

ब्रांडिंग सपोर्ट के तहत ई-कॉमर्स प्लेटफार्म फीस का 2 साल तक पचहत्तर प्रतिशत यानी 1 लाख प्रति वर्ष तक पुनर्भरण एवं ई-कॉमर्स वेबसाइट के व्यय का 60 प्रतिशत यानी 75000 एक मुश्त सहायता दी जाती है।

इन सभी योजनाओं की जानकारी एवं सहायता के लिए जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र उदयपुर पर संपर्क किया जा सकता है। एक्सपो के दौरान जिला उद्योग केंद्र - उदयपुर की ओर से राजस्थान ओड़ीओपी पालिसी-2024 की जानकारी के लिए एक संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया।

लोगों ने संजोया शीशमहल का सपना- एक्स्पो में श्री बालाजी ठीकरी ग्लास इन्ले वक्र्स को देख कर लोग चकित हो गये।

छोटे- छोटे कांच के रंगों के टुकडों से की जाने वाली कारीगरी जिनमें मन्दिरों में, होटलों की दीवारों पर, छतों पर या विभिन्न तरह की स्केच पेंटिंगों पर कांच के टुकड़ों से की जाने वाली करीगरी को लोगों ने खूब पसन्द किया।

संचालक गणेश वैष्णव ने बताया कि एक समय में लोग शीश महल गनवाया करते थे। आज उसका छोटा स्वरूप है।

लोग मन्दिरों में, होटलों में, दीवारों में आज भी ऐस कांच की कारीगरी करवाते हैं। इस कला को देश के विभिन्न हिस्सों सहित विदेशों में भी खूब पसन्द किया जाता है।

उन्होंने बताया कि एक बार उनके पास अमेरिका से शीश महल बनवाने का आर्डर आया। उन्होंने लोहौर में एक शीश महल जैसी कांच की कारीगरी देखी थी।

उन्होंने कहीं से उन्हें बनवाया। लेकिन वह उन्हें पसन्द नहीं आई।

उसके बाद उन्हें हमारे बारे में पता चला। उन्होंने हमें इसका ऑर्डर दिया।

उन्होंने उस कारीगरी के फोटो और वीडियो हमें भेजे ओर हमने हुबहू वेसी की वैसी उन्हें बना कर दी।

काॅफी बनाने की विभिन्न मशीनें भी आकर्षण का केन्द्र- एक्स्पो में एक स्टॉल पर कॉफी बनाने की मशीने भी आकर्षण का केन्द्र रही।

संचालक किशन गुर्जर ने बताया कि अॅटोमेटिक, सेमीऑटोमेटिक कॉफी मशीन, कॉफी बिन्स, इन्स्टेन्ट कॉफी, टी कॉफी, रेन्टल कॉफी मशीनों को देख आगन्तुकों ने उन्हें लेने में रूचि दिखाई।

कॉफी बनाने की मशीन 16500 से साढ़े तीन लाख तक कीमत की उपलब्ध है। घरों और बिजनेस परपज में काम आने वाली कॉफी मशीने आकर्षण का केन्द्र रही।