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Udaipur News

ऐना लॉरे पूलां ने उदयपुर में की दशा माता की पूजा

मेवाड़ की संस्कृति के रंग में रंगी फ्रांसीसी कलाकार

मुख्य बिंदु
  • राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराएं सात समंदर पार के कलाकारों को भी अपना कायल बना रही हैं।
  • इसी क्रम में फ्रांस की प्रसिद्ध कलाकार ऐना लॉरे पूलां ने शुक्रवार को उदयपुर के हर्ष नगर में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ दशा माता की पूजा-अर्चना की।
  • ऐना लॉरे, विरासत फोक डांस एंड पपेट शो की संचालिका विजयलक्ष्मी आमेटा के साथ उनके निवास के समीप स्थित मंदिर पहुंचीं।
  • भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी गहरी रुचि दिखाते हुए ऐना सुबह 5 बजे ही उठकर पारंपरिक परिधानों में तैयार हुईं।
  • हाथों में पूजा की थाली लेकर उन्होंने पीपल के वृक्ष की परिक्रमा की और दशा माता की कथा सुनकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।
  • शीतला सप्तमी पर भी दिखाई थी श्रद्धा भारतीय त्योहारों को करीब से जानने की उत्सुकता में ऐना ने इससे पहले शीतला सप्तमी के पर्व पर भी हिस्सा लिया था।
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ऐना लॉरे पूलां ने उदयपुर में की दशा माता की पूजा

उदयपुर। राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराएं सात समंदर पार के कलाकारों को भी अपना कायल बना रही हैं। इसी क्रम में फ्रांस की प्रसिद्ध कलाकार ऐना लॉरे पूलां ने शुक्रवार को उदयपुर के हर्ष नगर में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ दशा माता की पूजा-अर्चना की।

ऐना लॉरे, विरासत फोक डांस एंड पपेट शो की संचालिका विजयलक्ष्मी आमेटा के साथ उनके निवास के समीप स्थित मंदिर पहुंचीं। भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी गहरी रुचि दिखाते हुए ऐना सुबह 5 बजे ही उठकर पारंपरिक परिधानों में तैयार हुईं। हाथों में पूजा की थाली लेकर उन्होंने पीपल के वृक्ष की परिक्रमा की और दशा माता की कथा सुनकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।

शीतला सप्तमी पर भी दिखाई थी श्रद्धा भारतीय त्योहारों को करीब से जानने की उत्सुकता में ऐना ने इससे पहले शीतला सप्तमी के पर्व पर भी हिस्सा लिया था।

उन्होंने न केवल पूजा की विधि समझी, बल्कि इस दिन खाए जाने वाले पारंपरिक ठंडा भोजन (बास्योड़ा) के महत्व और उससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

विजयलक्ष्मी आमेटा ने बताया कि विदेशी कलाकारों का हमारी संस्कृति और रीति-रिवाजों के प्रति ऐसा समर्पण यह दर्शाता है कि मेवाड़ की विरासत वैश्विक स्तर पर अपनी अमिट छाप छोड़ रही है।

ऐना का यह पारंपरिक रूप और स्थानीय रस्मों में उनकी सहभागिता क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही।