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Udaipur News

शहर और गांव का सेतु, संस्कृति का जीवंत मंच बना अमृता हाट

मुख्य बिंदु
  • शहर की तेज रफ्तार जिंदगी के बीच अमृता हाट आज एक ऐसा ठहराव बनकर उभरा है, जहां महिलाओं की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता की कहानी सजीव रूप में दिखाई देती है।
  • मिट्टी की सौंधी खुशबू, हथकरघे के रंग-बिरंगे वस्त्र, देसी मसालों की महक और अपनत्व से भरी बातचीतकृइन सबके बीच अमृता हाट महिला सशक्तिकरण का सशक्त प्रतीक बन चुका है।
  • यह केवल खरीद-बिक्री का स्थान नहीं, बल्कि उन महिलाओं की पहचान है जिनका हुनर वर्षों तक घरों की चारदीवारी में सीमित रहा।
  • हाट में स्टॉल लगाने वाली महिलाओं का कहना है कि पहले उनके उत्पाद बड़े बाजारों तक तो पहुंचते थे, लेकिन पहचान और मुनाफा बिचैलियों के हाथ चला जाता था।
  • अमृता हाट ने यह दूरी समाप्त कर दी।
  • अब महिलाएं स्वयं अपने उत्पाद बेच रही हैं और ग्राहकों से सीधे संवाद कर रही हैं।
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शहर और गांव का सेतु, संस्कृति का जीवंत मंच बना अमृता हाट

उदयपुर। शहर की तेज रफ्तार जिंदगी के बीच अमृता हाट आज एक ऐसा ठहराव बनकर उभरा है, जहां महिलाओं की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता की कहानी सजीव रूप में दिखाई देती है।

मिट्टी की सौंधी खुशबू, हथकरघे के रंग-बिरंगे वस्त्र, देसी मसालों की महक और अपनत्व से भरी बातचीतकृइन सबके बीच अमृता हाट महिला सशक्तिकरण का सशक्त प्रतीक बन चुका है।

यह केवल खरीद-बिक्री का स्थान नहीं, बल्कि उन महिलाओं की पहचान है जिनका हुनर वर्षों तक घरों की चारदीवारी में सीमित रहा।

हाट में स्टॉल लगाने वाली महिलाओं का कहना है कि पहले उनके उत्पाद बड़े बाजारों तक तो पहुंचते थे, लेकिन पहचान और मुनाफा बिचैलियों के हाथ चला जाता था। अमृता हाट ने यह दूरी समाप्त कर दी। अब महिलाएं स्वयं अपने उत्पाद बेच रही हैं और ग्राहकों से सीधे संवाद कर रही हैं। इससे न केवल उत्पाद का मूल्य बढ़ा है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास को भी नई मजबूती मिली है।

प्रशासन और महिला अधिकारिता विभाग की ओर से वर्ष 2015-16 से आयोजित हो रहा अमृता हाट महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस वर्ष इसका आयोजन 18 फरवरी से किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में महिला स्वयं सहायता समूह और महिला उद्यमी भाग ले रही हैं।

अचार, पापड़, मसाले और मोटे अनाज से बने उत्पाद अब बेहतर पैकेजिंग और गुणवत्ता के साथ बाजार में उपलब्ध हैं। इससे महिलाओं को नियमित आय मिल रही है और परिवार व समाज में उनका सम्मान बढ़ा है। अमृता हाट सांस्कृतिक सशक्तिकरण का भी मंच है, जहां पारंपरिक आभूषण, लोक परिधान और हस्तकला आधुनिक जरूरतों के अनुरूप प्रस्तुत हो रही है।

महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक संजय जोशी ने बताया कि हर साल अमृता हाट में 80 से 120 स्टॉल लगाए जाते हैं। इस बार सांस्कृतिक आयोजनों के साथ खेल गतिविधियां भी आकर्षण का केंद्र होंगी।