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श्री नवकार महामंत्र के महामंगलकारी अखण्ड जाप के 100 दिन पूरे

संसार के परिभ्रमण से बचनें चार उपायों का करें उपयोगःनिरागरत्नविजय म.सा.

संसार के परिभ्रमण से बचनें चार उपायों का करें उपयोगःनिरागरत्नविजय म. सा.

मुख्य बिंदु
  • पन्यास प्रवर निरागरत्न विजय म.
  • ने कहा कि यदि हमें संसार के परिभ्रमण से बचना है तो हमें चार उपायों का उपयोग करना होगा।
  • वे आज जैन युवा मित्र संस्थान द्वारा सर्वऋतु विलास में श्री नवकार महामंत्र के मंगलकारी अखण्ड जाप के 100 दिन पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
  • उन्होंने कहा कि हमें सर्वप्रथम वेल एज्यूकेटेड बनना होगा जिसके तहत अपनी शिक्षा, जानकारी को संस्कारवान बनाना होगा।
  • जो न हमारंे भावों को और न सामनें वाले भावों को, वेल रिपोर्टर बनना होगा ताकि हमारंे द्वारा प्रसारित होने वाली हर बात किसी के घर, समाज जाति का भेद करनें वाली न बनें।
  • हर उस अच्छे कार्य के लिये हमारी ओर से आश्वासन दिया जायें।
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श्री नवकार महामंत्र के महामंगलकारी अखण्ड जाप के 100 दिन पूरे

उदयपुर। पन्यास प्रवर निरागरत्न विजय म.सा. ने कहा कि यदि हमें संसार के परिभ्रमण से बचना है तो हमें चार उपायों का उपयोग करना होगा।

वे आज जैन युवा मित्र संस्थान द्वारा सर्वऋतु विलास में श्री नवकार महामंत्र के मंगलकारी अखण्ड जाप के 100 दिन पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि हमें सर्वप्रथम वेल एज्यूकेटेड बनना होगा जिसके तहत अपनी शिक्षा, जानकारी को संस्कारवान बनाना होगा।

जो न हमारंे भावों को और न सामनें वाले भावों को, वेल रिपोर्टर बनना होगा ताकि हमारंे द्वारा प्रसारित होने वाली हर बात किसी के घर, समाज जाति का भेद करनें वाली न बनें।

वेल सपोर्टर बनना होगा। हर उस अच्छे कार्य के लिये हमारी ओर से आश्वासन दिया जायें।

आध्यात्म के मार्ग की ओर चलें। वेल डिवोटेड बनें ताकि हमारी सभी शक्तियों का समर्पण राष्ट्र,रक्षा,संस्कृति सुरक्षा,धर्म ,समाज सुरक्षा के लिये समर्पित बनें।

इस अवसर पर साध्वी डाॅ.चिन्तनश्री ने कहा कि नवकार का अपना आधार स्तम्भ है। बार-बार अन्त्येष्टी नहीं चाहते है तो पंच परमेष्टि की आराधना करे। नवकार में पाच पद है जो अभूतपूर्व है। यहीं एक मात्र ऐसा यंत्र है जो पापों का नष्ट करता है। जाप करनें से नकारात्कता समाप्त हांे कर सकारात्मकता आती है। वास्तु दोष दूर होता है।

इस अवसर पर साध्वी मधुकुवंर श्री ने कहा कि मंत्र की बहुत महिमा होती है। पानी और मन दोनों ढलान पर बहते है। पानी को नीचे से उपर ले जानें के लिये यंत्र चाहिये और मन की वासना को दूर हटाना हो तो मंत्र चाहिये होता है।

इस अवसर पर संस्थान के संरक्षक संजय भण्डारी ने जाप के बारें में विस्तृत जानकारी दी। लता भण्डारी ने मंगलाचरण प्रस्तुत की। रूचिका भण्डारी ने स्वागत किया। स्वागत गीत सरिता कावड़ि़या ने प्रस्तुत किया। वंदना निखिल कावड़िया ने की। संचालन पवन मेहता ने किया।