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Udaipur News

उदयपुर पशु चिकित्सालय में बीमार कबूतरों के साथ गंभीर अनियमितता व पशु क्रूरता के आरोप

मुख्य बिंदु
  • सुरेश जैन के बयान पर उठे गंभीर सवाल, तथ्यात्मक विरोधाभास उजागर उदयपुर | उदयपुर स्थित बहुउद्देश्यीय पशु चिकित्सालय में बीमार एवं घायल कबूतरों के उपचार, देखरेख एवं उनके पिंजरों को हटाने को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है।
  • दिनांक 02 जनवरी 2026 को प्रकाशित दैनिक नवज्योति समाचार तथा इससे संबंधित अस्पताल के आधिकारिक पत्र दिनांक 01.
  • 2025 के तथ्यों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर कई गंभीर विरोधाभास और संभावित पशु क्रूरता के संकेत सामने आए हैं।
  • समाचार में अस्पताल प्रशासन द्वारा यह कहा गया कि जिस संस्था ने कबूतरों के पिंजरे दान किए थे, वही संस्था पिंजरे स्वयं ले गई, जबकि यह कथन सरासर असत्य है।
  • वास्तविक स्थिति यह है कि सभी खाली पिंजरे आज भी अस्पताल परिसर के अंदर मौजूद हैं, जिन्हें किसी भी संस्था द्वारा बाहर नहीं ले जाया गया।
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उदयपुर पशु चिकित्सालय में बीमार कबूतरों के साथ गंभीर अनियमितता व पशु क्रूरता के आरोप

डॉ. सुरेश जैन के बयान पर उठे गंभीर सवाल, तथ्यात्मक विरोधाभास उजागर उदयपुर | उदयपुर स्थित बहुउद्देश्यीय पशु चिकित्सालय में बीमार एवं घायल कबूतरों के उपचार, देखरेख एवं उनके पिंजरों को हटाने को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है।

दिनांक 02 जनवरी 2026 को प्रकाशित दैनिक नवज्योति समाचार तथा इससे संबंधित अस्पताल के आधिकारिक पत्र दिनांक 01.09.2025 के तथ्यों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर कई गंभीर विरोधाभास और संभावित पशु क्रूरता के संकेत सामने आए हैं।

समाचार में अस्पताल प्रशासन द्वारा यह कहा गया कि जिस संस्था ने कबूतरों के पिंजरे दान किए थे, वही संस्था पिंजरे स्वयं ले गई, जबकि यह कथन सरासर असत्य है। वास्तविक स्थिति यह है कि सभी खाली पिंजरे आज भी अस्पताल परिसर के अंदर मौजूद हैं, जिन्हें किसी भी संस्था द्वारा बाहर नहीं ले जाया गया।

आधिकारिक पत्र से स्वयं अस्पताल की स्वीकारोक्ति अस्पताल के उपनिदेशक द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है कि: अस्पताल में घायल पक्षियों के लिए पिंजरे उपलब्ध हैं कबूतर उड़ने में असमर्थ एवं गंभीर रूप से घायल होते हैं उन्हें खुला नहीं छोड़ा जा सकता उपचार अस्पताल में ही किया जाता है Bird Park के नाम पर भ्रम फैलाने का प्रयास अस्पताल प्रशासन द्वारा यह तर्क दिया गया कि कबूतरों को Bird Park में भेजा गया, जबकि यह सर्वविदित है कि: Bird Park केवल पूर्णतः स्वस्थ पक्षियों को ही रखता है बीमार, घायल या उड़ने में असमर्थ पक्षियों का इलाज केवल पशु चिकित्सालय में ही संभव है एक दिन के उपचार में न तो गंभीर बीमारी ठीक होती है और न ही उड़ने की क्षमता वापस आती है सबसे बड़ा सवाल: बीमार कबूतरों का क्या हुआ?

डॉ. सुरेश जैन द्वारा दिए गए बयान के बाद अब सबसे गंभीर प्रश्न यह खड़ा होता है कि: उड़ने में असमर्थ बीमार उपचाराधीन कबूतरों के साथ वास्तव में क्या किया गया?

यदि उन्हें न तो अस्पताल में रखा गया और न ही Bird Park में लिया गया, तो यह पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के अंतर्गत एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

पशु कल्याण के नाम पर असंवेदनशील प्रशासन यह पूरा मामला यह दर्शाता है कि: साक्ष्य छुपाने का प्रयास किया गया पिंजरे हटाकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश हुई पशु प्रेमियों और समाज को गुमराह किया गया मांग पूरे मामले की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच बीमार कबूतरों के संबंध में लिखित रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई अस्पताल में पक्षियों के लिए स्थायी, स्वच्छ एवं मानक अनुसार सुविधा यह मामला केवल कबूतरों का नहीं, बल्कि सरकारी संस्थानों में पशु कल्याण की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है।