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Udaipur News

समय की तरह ही जीवन मूल्यवान, जिसका कोई मोल नहीं वह अनमोलःविपुलप्रभाश्री

मुख्य बिंदु
  • सूरजपोल स्थित दादाबाड़ी में साध्वी विपुल प्रभा श्रीजी ने कहा कि घड़ी में समय एक सा होता है।
  • सौ रुपये की हो या सौ लाख की, समय सब में वही होता है।
  • समय की तरह ही जीवन मूल्यवान है।
  • जिसका कोई मोल नहीं वह अमूल्य है।
  • सब का मोल लगाया जा सकता है बस समय का कोई मूल्य नही लगाया जा सकता।
  • लाखों, करोड़ों रुपये देकर भी 1 सेकंड तक वापस नही ला सकते।
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उदयपुर। सूरजपोल स्थित दादाबाड़ी में साध्वी विपुल प्रभा श्रीजी ने कहा कि घड़ी में समय एक सा होता है।

सौ रुपये की हो या सौ लाख की, समय सब में वही होता है। समय की तरह ही जीवन मूल्यवान है।

जिसका कोई मोल नहीं वह अमूल्य है। सब का मोल लगाया जा सकता है बस समय का कोई मूल्य नही लगाया जा सकता।

लाखों, करोड़ों रुपये देकर भी 1 सेकंड तक वापस नही ला सकते। जो बीत गया वापस नाही ला सकते।

घड़ी का एक एक सेकंड हमें कितने संदेश देता है। घड़ी अपना काम कर रही है हम अब तक सतर्क नाही हुए हैं।

जो समय गया, वो वापस नहीं आएगा। धर्म करना है। सेकंड का कांटा बताता है कि निरन्तर चलते रहो।

मिनट का कांटा सुख और दुख दोनों आते जाते रहेंगे का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि जीवन बहुत मुश्किल से मिला है। जैसी हमारी गतिविधियां है उससे लगता भी नही कि वापस यह मनुष्य जीवन मिलेगा।

7 से 8 बार मनुष्य जीवन मिल सकता है। अनंत भवों की यात्रा करने के बाद इस मनुष्य जीवन में आये हैं।

अनंत का अर्थ जिसका कोई अंत नहीं। इस जीवन में भी कुछ नही पाया तो अनंतानंत भटकना पड़ेगा।

सब कुछ इच्छा से काम कर सकते हैं। मोक्ष की तरफ भी जा सकते हैं।

ऐसा परोपकार करें कि वापस मनुष्य भव मिले। दूसरे भवों में परवश होते हैं लेकिन इस मनुष्य भव में खुद के वश में हैं।

खुद के समय का सदुपयोग करें और धर्म के प्रति आचरण करें।

साध्वी श्रीजी ने कहा कि जिनवाणी श्रवण का उद्देश्य एक ही कि हम में बदलाव हो। धर्म को रोज सुन रहे हैं लेकिन जीवन में उतारने की प्रक्रिया अब तक हमने शुरू नहीं की।

सबको मोक्ष चाहिए लेकिन अंदर से क्या किसी ने उस दौड़ के पीछे भागना शुरू किया? भौतिक, सांसारिक सुविधा के पीछे दौड़ रहे हो बस मोक्ष प्राप्ति की प्रक्रिया के पीछे अभी वहीं के वहीं हैं।

घर पर पानी ढोला तो कर्म बंधन लेकिन मंदिर में परमात्मा का प्रक्षाल किया तो कर्मों की निर्जरा होती है। धर्म के लिए एक स्थान क्यों बनाया, मंदिर, स्थानक क्योंकि वहां का ऑरा बहुत अलग होता है, ऊर्जा प्रवाहित होती है।