हिंदी केवल भाषा नहीं, ज्ञान, संस्कृति और भविष्य से जुड़ने का माध्यम है
हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संवेदना, विचार और ज्ञान-परंपरा से जुड़ने का सशक्त माध्यम है। बदलते डिजिटल परिवेश, वैश्वीकरण और आर्टि…
“साहित्यिक” के परिणाम
हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संवेदना, विचार और ज्ञान-परंपरा से जुड़ने का सशक्त माध्यम है। बदलते डिजिटल परिवेश, वैश्वीकरण और आर्टि…
कोटा। राजस्थान के भीलवाड़ा की लेखिका एवं कवयित्री शिखा अग्रवाल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ऑनलाइन अंग्रेजी कविता प्रतियोगिता में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की…
राजस्थान बहुरंगी सांस्कृतिक परम्पराओं का प्रदेश है। यहां की लोक संस्कृति और पर्यटक स्थलों की विदेशों में धूम है। यह विचार साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही रविवार क…
उदयपुर। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर द्वारा आयोजित मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत रविवार को शिल्पग्राम स्थित दर्पण सभागार में ‘मीता! पंचल…
उदयपुर, मेवाड़ की पहचान केवल उसके किलों, महलों और स्थापत्य से नहीं है। यह वह भूमि है जहां स्वाभिमान, संघर्ष और बलिदान की परंपराओं ने इतिहास को गहराई से प्रभावि…
उदयपुर। शायरी की मिठास, गीतों की सुरलहरियों और सावन-भादों की भावनाओं से सजी शायराना परिवार उदयपुर की सावन-भादों मिलन महफिल ऐश्वर्या कॉलेज परिसर में उत्साह और उ…
कोटा। समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत की राजस्थान प्रांत की धौलपुर इकाई द्वारा आयोजित भव्य सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी में संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. श…
भारत | 1 सितंबर 2026: जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल जनवरी 2027 में अपने ऐतिहासिक 20वें संस्करण के आयोजन की तैयारी कर रहा है। फ़ेस्टिवल अपने उन दो दशकों का जश्न मना र…
उदयपुर। शहर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था लफ़्ज़ों की महफ़िल की मासिक काव्य गोष्ठी रविवार को अशोका पैलेस के बैंक्वेट हॉल में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुई। स…
उदयपुर। साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए लेखक पारितोष चंद्र दुग्गड़ को प्रतिष्ठित ‘लीगेसी ऑफ लिटरेचर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह स…
उदयपुर। शहर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘लफ़्ज़ों की महफ़िल’ की ओर से रविवार, 30 अगस्त को सायंकाल 4 बजे अशोका पैलेस, जुडियो शोरूम के ऊपर, 100 फीट शोभागपुरा रोड…
नवोदित लेखकों के लिए मार्गदर्शक हैं प्रीति की प्रीत मय कविताएं ....थोड़ी ज़मीं - थोड़ा आसमानरहने दो, मेरी पंखों में थोड़ी परवाज रहने दो । इस दुनिया में है हस्त…