क्रोध छोड़कर क्षमा अपनाएं, सहनशक्ति ही सच्ची वीरताःडॉ. सुरेंद्र मुनि
उदयपुर । महावीर समवशरण में आयोजित धर्मसभा में डॉ. सुरेंद्र मुनि ने श्रद्धालुओं को क्रोध पर विजय प्राप्त कर जीवन में शांति, क्षमा और सहनशक्ति अपनाने का संदेश दि…
“रामायण” के परिणाम
उदयपुर । महावीर समवशरण में आयोजित धर्मसभा में डॉ. सुरेंद्र मुनि ने श्रद्धालुओं को क्रोध पर विजय प्राप्त कर जीवन में शांति, क्षमा और सहनशक्ति अपनाने का संदेश दि…
उदयपुर महावीर समवशरण में आयोजित धर्मसभा में डॉ. सुरेंद्र मुनि ने श्रद्धालुओं को क्रोध पर विजय प्राप्त कर जीवन में शांति, क्षमा और सहनशक्ति अपनाने का संदेश दिया…
राजस्थान की चित्रकला केवल रंगों और रेखाओं का संसार नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, आस्था और सौंदर्य का ऐसा जीवंत दस्तावेज है, जो अतीत को वर्तमान से जोड़ते हुए भव…
आर्यसमाज लक्ष्मण चौक, देहरादून का 60वां दो दिवसीय वार्षिकोत्सव आज दिनांक 3 -10-2026 को सोल्लास आरम्भ हुआ। आज प्रातः 8.00 बजे से तीन बड़ी यज्ञ वेदियों में यज्ञ क…
डाॅ सुषमा आहूजाइतिहास और विरासत पर्यटन विशेषज्ञ, कोटाराजस्थान की चित्रकला केवल रंगों और रेखाओं का संसार नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, आस्था और सौंदर्य का ऐसा ज…
उदयपुर। अहिंसा दिवस के अवसर पर विज्ञान समिति, अशोक नगर में “विभिन्न धर्मों में अहिंसा की अवधारणा” विषय पर विचारपूर्ण संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारं…
भारतीय संस्कृति में राम भक्त पवन पुत्र हनुमान के प्रति देव श्रद्धा भक्ति सर्वाधिक है। ज्ञान के सागर, अतुल्य बलशाली और संकष्ट मोचन हनुमान अनेक नामों और रूपों मे…
“रामो विग्रहवान् धर्मः साधुः सत्यपराक्रमः।राजा सर्वस्य लोकस्य देवानामिव वासवः॥”(श्रीमद् वाल्मीकि रामायण, अरण्यकाण्ड, सर्ग 37, श्लोक 13)अर्थात श्रीराम स्वयं साक…
बांसवाड़ा। निवृत्ति सभी कर्मों से विरत होकर कर्म सन्यास का मार्ग है किन्तु प्रवृत्ति सभी कर्मों के फल से विरक्ति भाव रखने का मार्ग है। मतलब कार्य करो मगर तटस्थ…
उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान में चल रही ‘अपनों से अपनी बात’ कथा के दौरान संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने अमावस्या, पितृ स्मरण और सेवा के महत्व को प्रेरक प्रस…
उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के सानिध्य में चल रही ‘अपनों से अपनी बात’ कथा में मंगलवार को राम भक्त हनुमान के प्रेरक प्रसंगों का वर्णन…
नवोदित लेखकों के लिए मार्गदर्शक हैं प्रीति की प्रीत मय कविताएं ....थोड़ी ज़मीं - थोड़ा आसमानरहने दो, मेरी पंखों में थोड़ी परवाज रहने दो । इस दुनिया में है हस्त…