नियम और मर्यादा से जीवन को मिलती है सही दिशाःडॉ.राजेंद्र मुनि
उदयपुर। जन्म और मरण जीवन के शाश्वत सत्य हैं, लेकिन इनके बीच मिला मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान है। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन का सदुपयोग करते हुए इसे नियम…
“सकता” के परिणाम
उदयपुर। जन्म और मरण जीवन के शाश्वत सत्य हैं, लेकिन इनके बीच मिला मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान है। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन का सदुपयोग करते हुए इसे नियम…
ऑस्ट्रेलिया इंडिया वॉटर सेंटर की अंतरराष्ट्रीय वेबिनार एआईडब्ल्यूसी वॉटर टॉक्स में डॉ. अनिल मेहता ने बताया जल-सुरक्षा, जल स्थायित्व का नया रास्ताजल सुरक्षा केव…
ऑस्ट्रेलिया इंडिया वॉटर सेंटर की अंतरराष्ट्रीय वेबिनार एआईडब्ल्यूसी वॉटर टॉक्स में डॉ. अनिल मेहता ने बताया जल-सुरक्षा, जल स्थायित्व का नया रास्तामध्यम आकार के …
भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पर्व केवल कैलेंडर की तारीख नहीं होते, बल्कि वे जीवन के किसी गहरे सत्य को हमारे सामने लेकर आते हैं। श्रीकृष्ण…
भारत के सबसे पसंदीदा पोटैटो चिप्स ब्रांड्स में से एक, लेज़® लंबे समय से खुशी, मस्ती और रोजमर्रा के यादगार पलों का पर्याय रहा है। वर्षों से ब्रांड ने यह दिखाया …
जैसलमेर । राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार एक्शन प्लान की पालना में अध्यक्ष ओमी पुरोहित, जिला एवं सेशन न्यायाधीश एवं सचिव ललित पुरोहित जिला…
जैसलमेर । नगरीय चुनाव-2026 के तहत मतदाता जागरूकता अभियान के अंतर्गत अनुपमा जोरवाल जिला कलेक्टर एवं मुख्य जिला निर्वाचन अधिकारी, जैसलमेर, स्वीप नोडल अधिकारी एवं…
मुंबई, अगर पिछले कुछ दिनों में आपने स्टार प्लस का इंस्टाग्राम पेज देखा है, तो शायद किसी पोस्ट ने आपको एक पल रुककर दोबारा देखने पर मजबूर किया होगा। और यही तो इस…
भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज कर एक बार फिर अपनी आर्थिक क्षमता का संकेत दिया है। बिश्केक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देशवासियों…
• सभी इंटरनेट यूजर्स के लिए उपलब्ध • 8 साल पुराने कंप्यूटर को भी AI-ready बनाने का दावा, प्लान ₹1,000 से शुरूनई दिल्ली, पुराना लैपटॉप या डेस्कटॉप स्लो हो गया ह…
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन... अर्थात, मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फल पर कभी नहीं। इसलिए फल की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य करें। निष्काम…
ऋषि दयानन्द के आगमन से पूर्व विश्व में लोगों को वेदों तथा ईश्वर सहित आत्मा एवं प्रकृति के सत्यस्वरूप का स्पष्ट ज्ञान विदित नहीं था। वेदों, उपनिषद एवं दर्शन आदि…