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दान में अहंकार नहीं, विनम्रता हो तो मिलता है सच्चा पुण्यःमुनि आदित्य सागर

महावीर भवन में कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान का शुभारंभ, अनुकम्पा योजना के दानदाताओं का किया सम्मान; 25 अक्टूबर को गमेर बाग में सजेगी जैन भक्ति संध्या

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दान में अहंकार नहीं, विनम्रता हो तो मिलता है सच्चा पुण्यःमुनि आदित्य सागर

उदयपुर। धन, रूप, ज्ञान और दान का अभिमान व्यक्ति के पुण्य को निष्फल कर सकता है।

सच्चा पुण्यार्जन तभी होता है, जब दान बिना अहंकार, दिखावे और किसी अपेक्षा के किया जाए। यह विचार सेक्टर-14 स्थित महावीर भवन में विराजित मुनि 108 श्री आदित्यसागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि अपनी संपत्ति, सुंदरता, ज्ञान और दान पर अभिमान नहीं करना आसान नहीं है, लेकिन आत्मकल्याण के लिए विनम्रता और निरभिमान भाव अपनाना आवश्यक है।ट्रस्ट महामंत्री भूरीलाल जैन ने बताया कि धर्मसभा का शुभारंभ मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

मंगलाचरण जमनालाल धतानिया एवं आर्या जैन, प्रतिभास्थली द्वारा किया गया। मुनिश्री के पद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन गेहरीलाल मुंडलिया परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि आरती का लाभ सेक्टर-11 निवासी जयंतीलाल रजावत परिवार ने लिया।

मुनिश्री के प्रवास के दौरान कोटा, जयपुर, इंदौर, भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से पहुंचे अतिथियों का स्वागत-अभिनंदन किया गया।अध्यक्ष भंवरलाल मुंडलिया ने बताया कि मुनिश्री के पावन सानिध्य में कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान का सुमधुर संगीत के साथ शुभारंभ हुआ।

इस दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने इंद्र-इंद्राणी बनकर भक्तिभाव से विधान में अर्घ्य अर्पित किए।

धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।अनुकम्पा योजना के तहत विशेष योगदान देने वाले श्री केशुलाल मालवी सहित अन्य दानदाताओं का अनुकम्पा टीम एवं ट्रस्ट की ओर से स्वागत और अभिनंदन किया गया।मंच संचालन राजेश देवड़ा ने किया।

इस अवसर पर आदित्य प्रेरणा मंच की ओर से 25 अक्टूबर 2026 को शाम 6 बजे से गमेर बाग में आयोजित होने वाली जैन भक्ति संध्या के पोस्टर का विमोचन भी किया गया।