उदयपुर। इस वर्ष कम वर्षा की आशंका के बीच नगर में संभावित जल संकट को देखते हुए वाटर हीरो 2020 एवं जल शक्ति मंत्रालय से सम्मानित डॉ. पी.सी. जैन ने भूजल स्तर बढ़ाने के लिए सड़कों के किनारे इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने का सुझाव दिया है। उन्होंने संबंधित बोर्ड एवं प्रशासन से आग्रह किया है कि गैस पाइपलाइन बिछाने के बाद जिन सड़कों के किनारों पर अभी डामरीकरण नहीं हुआ है, वहां जल पारगम्य सतह विकसित करने पर विचार किया जाए।
डॉ. जैन के अनुसार, नगर में 'वॉल-टू-वॉल' पक्की सड़कें बनने से वर्षा जल के जमीन में समाने की प्राकृतिक संभावनाएं कम हुई हैं। इसके कारण भूजल रिचार्ज प्रभावित हुआ है और भूजल स्तर में गिरावट की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व में राजा-महाराजाओं ने भविष्य में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से झीलों, कुओं और बावड़ियों का निर्माण कराया था। इन पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण और प्राकृतिक जल पुनर्भरण आज भी महत्वपूर्ण है।
पाइपलाइन कार्य के बाद मिल सकता है बेहतर विकल्प
डॉ. जैन ने बताया कि वर्तमान में सड़कों के दोनों ओर गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य चल रहा है और संबंधित हिस्सों पर अभी डामरीकरण नहीं हुआ है। ऐसे में यह एक अवसर है, जब सड़कों के किनारे इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाकर वर्षा जल को जमीन में समाने का रास्ता दिया जा सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से सुझाव दिया कि इंटरलॉकिंग टाइल्स के नीचे सीमेंट की ठोस परत नहीं बनाई जाए, क्योंकि इससे पानी के जमीन में रिसने की संभावना कम हो जाएगी। इसके बजाय ऐसी संरचना अपनाई जाए, जिससे वर्षा जल प्राकृतिक रूप से मिट्टी में समा सके।
भविष्य के जल संकट से बचाव में मिलेगी मदद
डॉ. जैन ने कहा कि भूजल रिचार्ज के बंद हो चुके रास्तों को दोबारा सक्रिय करना समय की आवश्यकता है। यदि नगर में सड़क निर्माण और मरम्मत के दौरान वर्षा जल के प्राकृतिक पुनर्भरण को प्राथमिकता दी जाए, तो इससे भूजल स्तर को बनाए रखने और भविष्य में पेयजल संकट के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करने की अपील की, ताकि वर्तमान निर्माण कार्यों के साथ ही भूजल संरक्षण के उपाय भी लागू किए जा सकें। उन्होंने विश्वास जताया कि समय रहते उठाया गया यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।
