भजन व भोजन दोनों का संतुलन जरूरीःडॉ. सुरेन्द्र मुनि
उदयपुर। देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में भक्तामर अनुष्ठान के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि यह मानव शरीर केवल भोजन के लिए …
“पुरुषार्थ” के परिणाम
उदयपुर। देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में भक्तामर अनुष्ठान के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि यह मानव शरीर केवल भोजन के लिए …
उदयवुर। देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में भक्तामर अनुष्ठान के पश्चात करवा चौथ के पावन पर्व पर बोलते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि मात्र सज-धज कर मेहंदी …
उदयपुर। स्थानीय देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में भक्तामर पाठ के पश्चात आयोजित धर्मसभा में संतों ने जीवन विकास के मूल सूत्रों पर प्रेरणादायी विचार रखे।सभा …
महाभारत भारतीय साहित्य, दर्शन और सांस्कृतिक स्मृति की अत्यंत महत्त्वपूर्ण कृति है। यह केवल कौरवों और पांडवों के युद्ध का आख्यान नहीं, बल्कि धर्म, सत्ता, न्याय,…
उदयपुर | विज्ञान समिति के दर्शन विज्ञान प्रकोष्ठ के तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परंपरा के परिप्रेक्ष्य में अहिंसक एवं उत्तरदायी अर्थशास्त्र” विषय पर एक सार्थक …
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में बुधवार को नियमित व्याख्यान में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कर्मसत्ता, आत्मशुद्धि और गुरु भक्ति का महत्व बताया…
गुरु वचनों में श्रद्धा से ही ज्ञान की सच्ची प्राप्ति संभवउदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में बुधवार को नियमित व्याख्यान में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाण…
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में मंगलवार को आयोजित नियमित व्याख्यान में श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा …
उदयपुर। दादावाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक चातुर्मास की सतत प्रवचन श्रृंखला में गुरुवर्या बहिन म.सा. डॉ. श्री विद्युतप्रभा श्रीजी ने आत्मविकास एवं मोक्षमार्ग पर प्…
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में गुरुवार को आयोजित नियमित व्याख्यान में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को पर्युषण पर्व की सार्थ…
उदयपुर | नेमिशारण्य में शान्ति के बुनियादी सिद्धांत खोजें गये और पाया कि प्रकृति में शान्ति है और प्रकृति विरोधी आचरण अशांति का कारण है। हमने प्रकृति अस्तित्व …
बांसवाड़ा। निवृत्ति सभी कर्मों से विरत होकर कर्म सन्यास का मार्ग है किन्तु प्रवृत्ति सभी कर्मों के फल से विरक्ति भाव रखने का मार्ग है। मतलब कार्य करो मगर तटस्थ…