उदयपुर। स्थानीय देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में भक्तामर पाठ के पश्चात आयोजित धर्मसभा में संतों ने जीवन विकास के मूल सूत्रों पर प्रेरणादायी विचार रखे।सभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि पुरुषार्थी व्यक्ति को पुरुषोत्तम का भी साथ मिलता है।
उन्होंने जीवन में उन्नति के दो सूत्रकृकड़ा पुरुषार्थ (मेहनत) और भाग्य बताए। उन्होंने कहा कि केवल भाग्य के भरोसे बैठना या कर्म की उपेक्षा करना गलत है, दोनों का समन्वय ही विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
भाग्य को प्रबल बनाने के लिए सात्विक जीवन, पूजा-पाठ और परोपकारी विचार आवश्यक हैं। क्रोध, अनुचित कार्य और पर-पीड़ा की भावना भाग्य का क्षय करती है।
सभी को संकल्प लेना चाहिए कि वे तन-मन-धन से दूसरों के सहयोगी बनें और किसी को व्यर्थ कष्ट न पहुँचाएँ।प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि केवल भाग्य या सिर्फ अकेला पुरुषार्थ पर्याप्त नहीं होता।
परिवार व व्यापार में अक्सर देखा जाता है कि समान अवसर होने पर भी एक व्यक्ति निरंतर प्रगति करता है और दूसरा वहीं रह जाता है। अतः पुरुषार्थ के साथ भाग्य को भी संवारें, सफलता स्वयं कदम चूमेगी।धर्मसभा में उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि ने मंगल गान प्रस्तुत किया।
अंत में समाज के अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन एवं महामंत्री हिम्मत बडाला ने आगामी 7 नवम्बर को आयोजित होने वाली ‘आचार्य देवेन्द्र सामूहिक गुणानुवाद सभा’ की जानकारी देकर सभी धर्मावलंबियों को आमंत्रित किया।