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Udaipur News

पर्युषण आत्मशुद्धि का अवसर, केवल पर्व मनाने से नहीं बदलता जीवन

कषायों को शांत करने के साथ उन्हें समाप्त करने का प्रयास ही सच्ची आराधना रू साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

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उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में गुरुवार को आयोजित नियमित व्याख्यान में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को पर्युषण पर्व की सार्थकता समझाते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हमें परमात्मा का शासन मिला है।

यदि हम इस शासन के सिद्धांतों को अपने जीवन में नहीं उतारते और उनका उपयोग नहीं करते, तो इसका कोई लाभ नहीं है।उन्होंने कहा कि भूख लगने पर सामने थाली, भोजन और मनपसंद सामग्री होने मात्र से भूख नहीं मिटती, बल्कि भोजन को अपने हाथों से ग्रहण करना पड़ता है।

इसी प्रकार पर्युषण में केवल धार्मिक क्रियाएं करने से आत्मशुद्धि नहीं होती, बल्कि मन के परिणामों को विशुद्ध करना आवश्यक है।

यदि पर्युषण के दौरान भी मन के विकार और कषाय शांत नहीं हुए तो पर्व का आना-जाना व्यर्थ हो जाता है।साध्वीश्री ने कहा कि पर्युषण जीवन में जमा हुए कचरे को साफ करने का अवसर है।

जिस प्रकार बीमारी सामान्य दवा से ठीक नहीं होने पर ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ती है, उसी प्रकार भीतर की कषायों को शांत करने के लिए नियमित आराधना के साथ पर्युषण की गहन साधना जरूरी है।उन्होंने कहा कि पर्युषण का उद्देश्य जीवन में परिवर्तन लाना है।

जीवन में दो प्रकार के लक्ष्य होते हैंकृएक सामने दिखाई देने वाला और दूसरा दूरगामी, अंतिम लक्ष्य। कषायों को शांत करना और उन्हें पूरी तरह समाप्त करना दोनों अलग बातें हैं।

मनुष्य के हाथ में पुरुषार्थ करना है, परिणाम उसके हाथ में नहीं है। इसलिए परिणाम की चिंता किए बिना निरंतर प्रयास करते रहना ही समझदारी है।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दौड़ में जीतता भले ही एक व्यक्ति हो, लेकिन सभी प्रतिभागी जीतने के प्रयास के साथ दौड़ते हैं।

इसी प्रकार आध्यात्मिक मार्ग पर भी अपनी क्षमता को कम आंककर प्रयास छोड़ना नहीं चाहिए। जैसी हमारी मानसिकता होती है, वैसा ही हमारा लक्ष्य बनता है।

कार्यक्रम में साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्ति गीत प्रस्तुत किया।