उदयपुर | विज्ञान समिति के दर्शन विज्ञान प्रकोष्ठ के तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परंपरा के परिप्रेक्ष्य में अहिंसक एवं उत्तरदायी अर्थशास्त्र” विषय पर एक सार्थक एवं विचारोत्तेजक वार्ता का आयोजन किया गया।
प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. पारस मल अग्रवाल ने विषय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्ति एवं समाज की प्रसन्नता, सुरक्षा तथा स्वास्थ्य के विकास में अर्थशास्त्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन का कार्य अर्थशास्त्र के दायरे में आता है, किंतु लालच एवं तृष्णा से उत्पन्न अशांति और संघर्ष को कम करने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा एवं अध्यात्म का समन्वय आवश्यक है।
मीडिया प्रभारी प्रो विमल शर्मा ने बताया कि हर माह के द्वितीय शनिवार को आयोज्य दर्शन विज्ञान व्याख्यान में आज के मुख्य वक्ता देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. गणेश कावड़िया ने आधुनिक अर्थशास्त्र के योगदान के साथ-साथ पर्यावरणीय संकट एवं आर्थिक असमानता जैसी वर्तमान विसंगतियों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों के साथ जोड़कर देखने की आवश्यकता है। नैतिकता, लालच में कमी, धर्मपूर्वक अर्थ का पुरुषार्थ तथा सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाना आवश्यक है।
डॉ. कावड़िया ने कहा कि व्यक्ति की प्रसन्नता के लिए केवल आर्थिक समृद्धि पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सहयोग की भावना, सक्रिय रहने का प्रयास, निरंतर सीखते रहने की आदत तथा समाज से जुड़े रहने का अभ्यास भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
परिचर्चा में कुलप्रमुख डॉ. के. एल. कोठारी, डॉ. एन. एल. कछारा, डॉ. के. एल. तोतावत, डॉ. प्रेमसुमन जैन, डॉ. एस. एल. गोदावत, डॉ. विमल शर्मा, डॉ. के. पी. तलेसरा, डॉ. आर. के. गर्ग, प्रकाश तातेड़, शांतिलाल भंडारी, डॉ. बी. एल. चावत, डॉ. सुजान सिंह, इंजीनियर आर. के. खोखावत, अशोक जैन, वर्द्धमान मेहता, इंजीनियर एम. पी. जैन, रेणु भंडारी एवं मधु मित्तल सहित उपस्थित विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त कर परिचर्चा को समृद्ध बनाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलप्रमुख डॉ. के. एल. कोठारी द्वारा प्रार्थना से किया गया। शांतिलाल भंडारी ने मंचासीन विद्वतजनों का तिलक एवं उपरणा द्वारा स्वागत किया।
