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पीएमसीएच में पांच दिवसीय‘हैंड्स ऑन एमआईएस पीडियाट्रिक एंड नियोनेटल वर्कशॉप’ का समापन

नई सर्जिकल तकनीकों से नवजातों को मिलेगा नया जीवन; सर्जन्स ने सीखीं बाल शल्य चिकित्सा की बारीकियां

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पीएमसीएच में पांच दिवसीय‘हैंड्स ऑन एमआईएस पीडियाट्रिक एंड नियोनेटल वर्कशॉप’ का समापन

उदयपुर, पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) के शिशु शल्य चिकित्सा विभाग और इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीडियाट्रिक सर्जन्स (आईएपीएस) राजस्थान चौप्टर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ‘हैंड्स ऑन एमआईएस पीडियाट्रिक एंड नियोनेटल वर्कशॉप’ शुक्रवार, 20 फरवरी को सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। इस कार्यशाला में देशभर से आए बाल शल्य चिकित्सकों (पीडियाट्रिक सर्जन्स) ने हिस्सा लिया और नवजात शिशुओं व बच्चों की जटिल बीमारियों के इलाज की सबसे उन्नत मिनिमली इनवेसिव सर्जरी (एमआईएस) तकनीकों का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।

समापन समारोह को संबोधित करते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान में एमआईएस (दूरबीन और छोटे चीरे वाली सर्जरी) बच्चों के लिए एक बहुत बड़ा वरदान साबित हो रही है।

पहले जिन जटिल ऑपरेशनों के लिए नवजात शिशुओं के शरीर पर बड़े चीरे लगाने पड़ते थे, आज वही काम महज कुछ मिलीमीटर के सुराख (की-होल) के जरिए अत्याधुनिक उपकरणों और कैमरे की मदद से किया जा रहा है।

इससे बच्चों को न केवल दर्द कम होता है, बल्कि अस्पताल में भर्ती रहने का समय भी घट जाता है, रिकवरी अत्यंत तेजी से होती है और शरीर पर बड़े निशान भी नहीं रहते।

आयोजन सचिव डॉ. प्रवीण झंवर ने बताया कि कार्यशाला के इन पांच दिनों के दौरान थोरैकोस्कोपिक सीडीएच रिपेयर (डायाफ्रामेटिक हर्निया), लैप्रोस्कोपिक पायलोप्लास्टी (किडनी की नली की रुकावट), लैप्रोस्कोपिक आंशिक नेफ्रेक्टॉमी और लैप्रोस्कोपिक पुल थ्रू जैसी बेहद जटिल और संवेदनशील सर्जरियों का लाइव डेमोन्स्ट्रेशन किया गया।

ऑपरेशन थियेटर से सीधा प्रसारण सभागार में किया गया, जहां बैठे युवा सर्जन्स ने विशेषज्ञों से सीधे सवाल-जवाब किए और सर्जिकल बारीकियों को गहराई से समझा।

कार्यशाला में अमेरिका (वर्जीनिया) से आए मुख्य अतिथि डॉ. अश्विन पिंपलवार के अलावा देश के अन्य ख्यातिनाम चिकित्सकों ने अपना ज्ञान साझा किया।

एम्स जोधपुर के डॉ. राहुल सक्सेना, जयपुर के डॉ. रमेश टिंगल, कोटा के डॉ. समीर मेहता और वाराणसी की डॉ. चारु यादव ने लाइव ऑपरेशन कर आधुनिक सर्जिकल कौशलों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

उन्होंने केस स्टडीज के माध्यम से ऑपरेशन के दौरान आने वाली संभावित चुनौतियों और उनके त्वरित समाधान पर भी विस्तार से चर्चा की।

पीएमसीएच के चेयरमेन राहुल अग्रवाल ने इस भव्य आयोजन की सफलता पर बाल शल्य चिकित्सा विभाग और पूरी आयोजन समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा, पीएमसीएच का हमेशा से यह विजन रहा है कि हम चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे वैश्विक बदलावों और नई तकनीकों को मेवाड़ तक लेकर आएं।

इस वर्कशॉप से प्रशिक्षित होकर जाने वाले डॉक्टर जब इन तकनीकों का उपयोग करेंगे, तो इसका सीधा लाभ आम मरीजों को मिलेगा। अब मेवाड़ के लोगों को बच्चों की जटिल सर्जरी के लिए महानगरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।

इस दौरान पीएमसीएच के प्रिंसिपल डॉ. यू.एस. परिहार,आयोजन चेयरमेन डॉ.रेणु रॉवका और डॉ.गौरव वधावन, संयुक्त सचिव डॉ. धवल शर्मा सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे।