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पेसिफिक कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी में फेशियल साइंस और मायोफेशियल रिलीज पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन

दर्द प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों पर हुआ मंथन

मुख्य बिंदु
  • उदयपुर, चिकित्सा और फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में लगातार हो रहे नए अनुसंधानों और उपचार की आधुनिक तकनीकों से विद्यार्थियों व विशेषज्ञों को रूबरू कराने के उद्देश्य से पेसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी के पेसिफिक कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी में फेशियल साइंस और मायोफेशियल रिलीज तकनीक पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
  • कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य वक्ता पोलैंड के मारियस कुर्काेवस्की,पीएमयू के डॉ.
  • मंगल तथा पेसिफिक कॉलेज ऑफ फिजियोथैरेपी के डीन डॉ.
  • जफर खान सहित अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
  • वर्कशॉप के सफल आयोजन पर पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के चेयरमैन राहुल अग्रवाल, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अमन अग्रवाल और सीईओ शरद कोठारी ने आयोजकों एवं प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।
  • उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं से विद्यार्थियों और विशेषज्ञों को फिजियोथेरेपी की आधुनिक उपचार तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है।
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पेसिफिक कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी में फेशियल साइंस और मायोफेशियल रिलीज पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन

उदयपुर, चिकित्सा और फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में लगातार हो रहे नए अनुसंधानों और उपचार की आधुनिक तकनीकों से विद्यार्थियों व विशेषज्ञों को रूबरू कराने के उद्देश्य से पेसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी के पेसिफिक कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी में फेशियल साइंस और मायोफेशियल रिलीज तकनीक पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य वक्ता पोलैंड के मारियस कुर्काेवस्की,पीएमयू के डॉ. एम.एम. मंगल तथा पेसिफिक कॉलेज ऑफ फिजियोथैरेपी के डीन डॉ.जफर खान सहित अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।वर्कशॉप के सफल आयोजन पर पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के चेयरमैन राहुल अग्रवाल, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अमन अग्रवाल और सीईओ शरद कोठारी ने आयोजकों एवं प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं से विद्यार्थियों और विशेषज्ञों को फिजियोथेरेपी की आधुनिक उपचार तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है।

साथ ही, उनके नैदानिक ज्ञान एवं उपचार कौशल में वृद्धि होती है, जिससे मरीजों को बेहतर और प्रभावी उपचार सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।इस अवसर पर डॉ.एम.एम. मंगल ने अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि फेशियल साइंस और मायोफेशियल रिलीज फिजियोथेरेपी की महत्वपूर्ण तकनीकें हैं, जो मांसपेशियों में होने वाले दर्द को कम करने, ऊतकों के लचीलेपन को बेहतर बनाने तथा शरीर की गतिशीलता बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं।

इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करती हैं और उन्हें आधुनिक उपचार पद्धतियों से अवगत कराती हैं।कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता मारियस कुर्काेवस्की ने फेशियल सिस्टम की जटिल संरचना और शरीर में इसकी कार्यप्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि फेशिया शरीर में संयोजी ऊतकों का वह जाल है जो हमारी मांसपेशियों और अंगों को सहारा देता है। चोट, तनाव या गलत पोस्चर के कारण जब यह ऊतक सख्त हो जाते हैं, तो शरीर में गंभीर दर्द और अकड़न होती है।

कुर्काेवस्की ने बताया कि मायोफेशियल रिलीज तकनीक के जरिए विशेष मैनुअल थेरेपी से इस अकड़न को दूर किया जाता है।

कार्यशाला में शरीर के फेशियल टिश्यू, मांसपेशियों की गतिशीलता (मोबिलिटी), शरीर के लचीलेपन और दर्द प्रबंधन में इस तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका को वैज्ञानिक तथ्यों के साथ समझाया गया।इस दौरान फिजियोथैरेपी के डीन डॉ.जफर खान ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य फिजियोथेरेपी की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों और युवा विशेषज्ञों के सैद्धांतिक ज्ञान को क्लिनिकल कौशल से जोड़ना है।

जिससें आधुनिक चिकित्सा में मरीजों को त्वरित आराम पहुंचाने के लिए विद्यार्थियों को नवीन उपचार तकनीकों की जानकारी हो सके।डॉ.जफर ने बताया कि इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को न केवल इस तकनीक के वैज्ञानिक आधार को समझने का मौका मिला, बल्कि इसके व्यावहारिक उपयोग और आधुनिक फिजियोथेरेपी में इसकी बढ़ती प्रासंगिकता का भी गहराई से बोध हुआ साथ ही विद्याथियों को अपने क्लिनिकल नॉलेज और ट्रीटमेन्ट स्किल को विकसित करने का एक बेहतरीन मंच मिला।कार्यशाला में डॉ.दीपक लोहार,डॉ.फारूख मोहम्मद,डॉ.आदिल रज़ा अंसारी,डॉ.हीरेंद्र कटारिया,डॉ.दिव्या तिवारी,डॉ.रेणुका पाल,खुशवीर सिंह राजावत,डॉ.सुहानी भटनागर, डॉ.अभिषेक अरोड़ा,डॉ.दीपिका बलाला,डॉ.पायल शर्मा,डॉ.सौरव सोनी,डॉ.आबिद,डॉ. हसनैन,डॉ.दिलावर खान,डॉ.लौकिक और श्वेता राजपूत सहित कॉलेज के समस्त फैकल्टी की भागीदारी रही।