राजस्थान की रेतीली छाती पर, एक नाम है उगा – भजनलाल। जैसे सूखी माटी पर पहली बारिश की बूँद , जिसकी पगड़ी में बँधा है मरुस्थल का गर्व, आँखों में है माँ सी ममता का सागर। जब बोलें तो लगता है धरती बोल रही, हर शब्द में उनके बसती है जनता की आवाज़ ।
कितनी रातें जागी होंगी उन आँखों ने, जब किसान की फसल सूख रही थी रेगिस्तान में। कितनी बार सीने पर हाथ रखकर सोचा होगा, “मेरी माटी को कैसे हरा करूँ?”
भजन की तरह सरल, छोटे बालक से सच्चे , उनके दिल में बसते हैं राजस्थान के सभी बच्चे । जब कोई बेटी स्कूल जाती है मुस्कुराते हुए, उनकी आँखें नम हो जाती हैं चुपके-चुपके।
वे विकास नहीं, सपनों को जीवित करते हैं, रेगिस्तान में नहीं, दिलों में बाग लगाते हैं। हर एक सड़क, पानी की हर एक बूँद, उनके प्यार की चुपचाप लिखी हुई कहानी है।
भजनलाल… नाम ही नहीं, एक एहसास है, मिट्टी से जुड़ा, मिट्टी को पुकारता हुआ। जब वो हाथ उठाकर आशीर्वाद देते हैं, लगता है पूरा राजस्थान उनकी छत्रछाया में है तूफानों से लड़ते, धूप से नहीं झुकते ये वो इंसान है जो रुके बिना थके बिना काम करते हैं।
फिर भी कभी-कभी अकेले में उन्हें याद आती होगी, वो छोटा सा गाँव, वो बचपन की मिट्टी… जिसने उन्हें सिखाया – सेवा परमो धर्म ।
कभी राजस्थान रोता था, अब गुनगुनाता है, भजनलाल के नाम से हर राजस्थानी मुस्कुराता है। तुम मुख्यमंत्री नहीं, हमारे अपने से हो तुम हमारी उम्मीदों का सबसे प्यारा नाम हो।
राजस्थान की धरा पर उभरने वाला एक सूरज हो।
माटी का वो सूरज जो सुराज लाएगा , सुजस के साथ सबके दिलों पर छा जायेगा ।