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Literature News

*कलात्मक जैन मंदिरों का जादुई सम्मोहन"

राजेंद्र कुमार जैन ( लेखक तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा से सेवानिवृत्त सहायक कुल सचिव हैं। संगीत एवं साहित्यिक संस्थाओं में सक्रिय हैं )

राजेंद्र कुमार जैन ( लेखक तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा से सेवानिवृत्त सहायक कुल सचिव हैं। संगीत एवं साहित्यिक संस्थाओं में सक्रिय हैं )

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*कलात्मक जैन मंदिरों का जादुई सम्मोहन"
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जैन मंदिर भारत के जैन धर्मावलंबियों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के तो महान पूजा स्थल हैं ही साथ ही अपनी अतुलनीय कारीगरी, बेमिसाल मूर्ति शिल्प और स्थापत्य कला के जादुई सम्मोहन से देश - विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम और पर्यटन केंद्र हैं। समाज के भामाशाहों और श्रेष्ठियों द्वारा निर्मित मंदिरों की प्राचीनता, भव्यता, स्थापत्य कला, मूर्तिकला और शांत वातावरण देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

हमारे देश में सदियों से सभी धर्मो के लोग भाईचारे की भावना से साथ रहते आए हैं। भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान में सभी को अपने अपने धर्म का पालन करने और प्रसार करने का अधिकार हैं।

भारत में जैन धर्म भी अपने अभ्युदय से लेकर आज तक फल-फूल रहा है। जिस प्रकार सभी धर्म के लोगों ने अपने अपने पूजा स्थल मन्दिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे आदि का निर्माण किया वैसे ही जैन अनुयायियों ने भी उनके पूज्य तीर्थंकर भगवानों के मंदिरों का निर्माण किया।

इनके मन्दिर सम्पूर्ण भारत के साथ साथ विदेशों में भी पाए जाते हैं।

धार्मिक स्थल सभी भारतवासियों की श्रद्धा का केन्द्र हैं। सभी लोग एक दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं और धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं।

धार्मिक आयोजन देश की एकता, भाईचारे और सांप्रदायिक सदभाव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हमारी यही प्रवृति देश को एकता की डोर में बंधे रखती है।

सभी धर्मों की तरह जैन धर्म के भी अपने सिद्धांत, पूजा पद्धति, नियम हैं। महावीर स्वामी की शिक्षाओं और सिद्धांतों को पूरा जगत मानता है।

जैन साधु संत वर्षों से निरन्तर अपने प्रवचनों के माध्यम से समाज में इनका प्रचार प्रसार कर समाज को जाग्रत बनाए हुए हैं। जैन धर्म के उदय, विकास, तीर्थंकरों और मंदिरों पर आधारित है।

जैन मंदिर जहां जैनियों की वंदना और श्रद्धा के केंद्र हैं वहीं भारत के पर्यटन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत के जैन मंदिरों में रणकपुर और दिलवाड़ा (राजस्थान), पालिताना (गुजरात), श्रवणबेलगोला (कर्नाटक), सम्मेद शिखरजी (झारखंड), सोनागिरि (मध्य प्रदेश) और पावापुरी (बिहार) खजुराहो, अष्टापद (बद्रीनाथ) अयोध्या, मंगलायतन, जंबुद्वीप हस्तिनापुर, गोमटेश्वर बाहुबली, पावागढ़ (गुजरात) प्रमुख जैन पर्यटन स्थल हैं।

जैन मंदिरों के कारण धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ विरासत एवं सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। उदाहरण के लिए, रणकपुर मंदिर की बारीक पत्थर की नक्काशी और 1444 नक्काशीदार स्तंभ पर्यटकों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है। इन मंदिरों के माध्यम से भारतीय स्थापत्य और कला की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचती है।

करौली जिले में स्थित श्री महावीर जी जैन मंदिर, झालावाड़ जिले में स्थित श्री चांदखेड़ी तीर्थ क्षेत्र, केशोरायपाटन, बिजोलिया के जैन मंदिर, भीलवाड़ा जिले में स्थित जहाजपुर जैन मंदिर , उन्हेल जैन मंदिर में पर्यटकों एवं दर्शनार्थियों का आवागमन बहुत अधिक रहता है। इनसे पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।

पर्यटन के विकास से इन तीर्थस्थलों के आसपास होटल, परिवहन, भोजन, स्थानीय बाजार, गाइड और हस्तशिल्प जैसी गतिविधियाँ बढ़ती हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के अवसर मिलते हैं तथा छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को बल मिलता है।

केंद्र और राज्य सरकारें सड़क, स्वच्छता, सुरक्षा, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और पर्यटक सुविधाओं के विकास के माध्यम से तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा देती हैं। केंद्र की प्रसाद योजना के अंतर्गत धार्मिक एवं विरासत स्थलों पर पर्यटन अवसंरचना विकसित की जा रही है। योजना में पैदल मार्ग, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय, कचरा प्रबंधन और सुरक्षा जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

जैन मंदिरों का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक भी है। अहिंसा, अपरिग्रह और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जैसे जैन विचार सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा दे सकते हैं।

जैन मंदिर भारत में धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इनका संरक्षण और बेहतर पर्यटन सुविधाओं से विकास भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन की नई संभावनाओं से जोड़ सकता है।

संपर्क : 6 बी 3, विधायक कालोनी, रंगबाड़ी योजना, कोटा मो. 9413472 655