जैसलमेर। भीषण गर्मी के मद्देनज़र आमजन को सुचारू पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा बंद एवं अनुपयोगी नलकूपों के पुनर्विकास का विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं, जिससे आगामी ग्रीष्म ऋतु में पेयजल संकट से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
जिला कलक्टर के निर्देशानुसार चलाए जा रहे इस अभियान के तहत भूजल विभाग के सहयोग से अब तक जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, शहर खंड के 6 बंद नलकूपों को सफलतापूर्वक पुनः चालू किया जा चुका है।
अधीक्षण अभियंता नीरजन मीणा ने बताया कि गर्मी से पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में नए पेयजल स्रोत विकसित करना विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण था, विशेषकर सीमावर्ती एवं पशु-बहुल गांवों में। लुणार, सम एवं सियाबर गांवों में कई नलकूप रेत भराव, पत्थर आने एवं जलस्तर गिरने के कारण बंद हो गए थे। इन नलकूपों के पुनः संचालन से अब इन क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
प्रभारी भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया के अनुसार, नलकूपों के पुनर्जीवन के लिए विशेष हेवी-ड्यूटी रिग मशीन का उपयोग किया गया, जिससे गहराई तक सफाई कर उन्हें पुनः जल उपलब्ध कराने योग्य बनाया गया। यह तकनीक कम लागत में प्रभावी जल स्रोत विकसित करने में सहायक सिद्ध हो रही है।
अधिशाषी अभियंता ने बताया कि इन नलकूपों के पुनः चालू होने से न केवल विभाग को कम लागत में नए जल स्रोत प्राप्त हुए हैं, बल्कि आगामी नहरबंदी के दौरान पेयजल प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि जिले के अन्य अनुपयोगी नलकूपों को भी इसी प्रकार पुनर्जीवित करने की कार्ययोजना बनाई जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सतत एवं सुलभ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
