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Jaislmer news

पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित

पशु चिकित्सा ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर दिया गया विशेष जोर

मुख्य बिंदु
  • पशुपालन विभाग के संयुक्त सचिव मुतु स्वामी की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला कलक्टर सभागार में पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
  • बैठक में जैसलमेर जिले की भौगोलिक स्थिति एवं पशु बाहुल्य स्वरूप को ध्यान में रखते हुए विभागीय योजनाओं की प्रगति एवं चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
  • संयुक्त सचिव मुतु स्वामी ने कहा कि क्षेत्रफल की दृष्टि से जैसलमेर राज्य का सबसे बड़ा जिला होने के साथ-साथ पशु संपदा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • जिले में भेड़, बकरी एवं ऊँट जैसे पशुओं की संख्या अधिक है, ऐसे में पशुपालकों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना विभाग की प्राथमिकता है।
  • इस अवसर पर जिला कलक्टर प्रताप सिंह, अतिरिक्त जिला कलक्टर परसराम सैनी सहित उष्ट्र पालक देवीसिंह, मनोहरसिंह एवं मूलसिंह उपस्थित रहे।
  • बैठक में पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ.
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      जैसलमेर। पशुपालन विभाग के संयुक्त सचिव मुतु स्वामी की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला कलक्टर सभागार में पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जैसलमेर जिले की भौगोलिक स्थिति एवं पशु बाहुल्य स्वरूप को ध्यान में रखते हुए विभागीय योजनाओं की प्रगति एवं चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।

     संयुक्त सचिव मुतु स्वामी ने कहा कि क्षेत्रफल की दृष्टि से जैसलमेर राज्य का सबसे बड़ा जिला होने के साथ-साथ पशु संपदा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिले में भेड़, बकरी एवं ऊँट जैसे पशुओं की संख्या अधिक है, ऐसे में पशुपालकों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना विभाग की प्राथमिकता है। इस अवसर पर जिला कलक्टर प्रताप सिंह, अतिरिक्त जिला कलक्टर परसराम सैनी सहित उष्ट्र पालक देवीसिंह, मनोहरसिंह एवं मूलसिंह उपस्थित रहे।

      बैठक में पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. उमेश वंरगटीवार ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले के प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम तीन पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों को पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत करने की आवश्यकता है, जिससे पशु चिकित्सा अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ पशुपालकों तक बेहतर रूप से पहुँचाया जा सके।

      उन्होंने बताया कि जिले में पशु चिकित्सा संस्थाओं के बीच दूरियां अधिक होने एवं पशुपालकों के ढाणियों में दूरस्थ क्षेत्रों में निवास करने के कारण विभागीय योजनाओं की जानकारी समय पर पहुँचाने में कठिनाइयाँ आती हैं। वर्तमान में जिले में कुल 209 पशु चिकित्सा संस्थाएं संचालित हैं, जिनमें से 162 संस्थाओं को पट्टा प्राप्त है। इनमें 66 संस्थाओं में भवन निर्मित हैं, जबकि 96 संस्थाओं में भवन निर्माण की आवश्यकता है। शेष 48 संस्थाओं के लिए पट्टा प्राप्त किया जाना लंबित है।

      डॉ. वंरगटीवार ने कहा कि सभी संस्थाओं में भवन, बिजली, पानी एवं फर्नीचर जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होने से अधिकारी एवं कर्मचारी मुख्यालय पर रुक सकेंगे, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। उन्होंने बताया कि पशुओं के खुले चराई क्षेत्रों में रहने के कारण एफएमडी टीकाकरण एवं वैक्सीन की कोल्ड चेन बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। एनएडीसीपी योजना के अंतर्गत एफएमडी टीकाकरण कर ऑनलाइन डाटा संधारण का कार्य किया जा रहा है। साथ ही उष्ट्र संरक्षण योजना के अंतर्गत ऊँट पालकों को लाभान्वित किया जा रहा है