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स्वास्थ्य एवं पे*क्षाध्यान पर संगोष्ठी का आयोजन

ध्यान से भावों में स्थिरता आती है, यह स्थिरता ही हमें स्वस्थ बनाती है ः के. सी. जैन

ध्यान से भावों में स्थिरता आती है, यह स्थिरता ही हमें स्वस्थ बनाती है ः के. सी.

मुख्य बिंदु
  • तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम एवं पे*क्षा वाहिनी के संयुक्त तत्वाधान में स्वास्थ्य एवं पे*क्षाध्यान विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
  • मुख्य वक्ता मुख्य आयकर आयुक्त, राजस्थान के.
  • सी जैन ने कहा कि शांति में अद्भुत आनंद की अनुभूति रहती है।
  • हम 4॰ वर्षों से पे*क्षाध्यान से परिचित हैं।
  • ध्यान उपयोगी है और हम इंद्रियों की समता अनुसार चलते हैं।
  • चेतन मन इंद्रियों के साथ जुडा है, अवचेतन मन के स्तर पर इंद्रियों की सीमा समाप्त हो जाती है, अवचेतन मन को जानना ही ध्यान है।
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स्वास्थ्य एवं पे*क्षाध्यान पर संगोष्ठी का आयोजन

उदयपुर। तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम एवं पे*क्षा वाहिनी के संयुक्त तत्वाधान में स्वास्थ्य एवं पे*क्षाध्यान विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।

मुख्य वक्ता मुख्य आयकर आयुक्त, राजस्थान के.सी जैन ने कहा कि शांति में अद्भुत आनंद की अनुभूति रहती है। हम 4॰ वर्षों से पे*क्षाध्यान से परिचित हैं।

ध्यान उपयोगी है और हम इंद्रियों की समता अनुसार चलते हैं। चेतन मन इंद्रियों के साथ जुडा है, अवचेतन मन के स्तर पर इंद्रियों की सीमा समाप्त हो जाती है, अवचेतन मन को जानना ही ध्यान है।

उन्होंने कहा कि जो जानते है वह विज्ञान है, नहीं जानते वह आश्चर्य है लेकिन प्रकति की सभी क्रियाए निश्चित नियमों के अनुसार ही संचालित होती हैं।

जैसे जैसे उन नियमों का ज्ञान होने लगता है वह विज्ञान है। धर्म प्रकृति के नियम व क्रियाओं की जानकारी देता है।

इन नियमों व प्रक्रियाओ के अनुरूप चलना ही धर्म है। प्रत्येक विचार भाव तंत्र से जुडा है।

उत्पन्न होने वाली नकारात्मक भाव तरंग से इंडोक्राइम सिस्टम पर विपरीत प्रभाव पडता है जिससे शरीर में विषैले तत्वों का प्रभाव बढता है और रोग उत्पन्न होते हैं।

पे*क्षाध्यान से भावों में स्थिरता आती है एवं सकारात्मक तरंगों का शरीर में प्रभाव बढता है जिससे व्यक्ति निरोग रह सकता है।

मुनि धर्मेश कुमार ने महाप्राण ध्वनि का अभ्यास कराया एवं कहा कि मन की चंचलता को कम करने के लिए यह अभ्यास सार्थक है। उन्होंने अमेरिका की साइंस कांग्रेस का उदाहरण देते हुए कहा की 1॰॰ वर्ष पश्चात फिसिक्स ऑफ कोशियसनेस पर अनुसंधान की जरूरत पडेगी। उन्होंने कहा कि हम बहुत भाग्यशाली हैं की आचार्य तुलसी व आचार्य महापज्ञ ने पे*क्षाध्यान जैसी ध्यानप्रणाली दी जिसकी आवश्यकता आने वाले हजारों वर्षो तक रहेगी।

प्रवक्ता डॉ. तुक्तक भानावत ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. विजयलक्ष्मी के मंगलाचरण से हुआ। अथितियों का स्वागत टीपीएफ अध्यक्ष निर्मल धाकड एवं तेरापंथ सभाअध्यक्ष एस. पी. मेहता ने किया।

परिचय डॉ. निर्मल कुणावत ने दिया। अतिथियों का सम्मान बी.पी. जैन, ओ.पी. कांठेड, मुकेश बोहरा व शिल्पा कंठालिया ने किया।

धन्यवाद पे*क्षावाहिनी अध्यक्ष सुबोध दुग्गड ने दिया। संचालन टीपीएफ सचिव ऋषभ मेडतवाल ने किया।

कार्यक्रम में मुख्य आयकर आयुक्त उदयपुर श्रीमती नीना कुमार व अन्य आयकर अधिकारी भी उपस्थित थे।