गणपति विसर्जन के व्यस्त दिनों में से एक होने के बावजूद, रविवार को एनसीपीए एक्सपेरिमेंटल थिएटर में ‘जिगसॉ’ के प्रीमियर शो के दौरान दर्शकों से खचाखच भरा माहौल देखने को मिला।
यह नया साइकोलॉजिकल थ्रिलर नाटक थिएटर के दिग्गज भरत दाभोलकर और ‘साहो’ तथा ‘ये काली काली आंखें’ फेम अभिनेत्री दामिनी चोपड़ा को मुख्य भूमिकाओं में लेकर आया है।
अश्विन गिडवानी के एजीपी वर्ल्ड द्वारा निर्मित इस नाटक के प्रीमियर में पूर्व मीडिया हस्ती से थिएटर प्रोड्यूसर बनीं इंद्राणी मुखर्जी और थिएटर की दिग्गज डॉली ठाकोर समेत मुंबई के थिएटर और मनोरंजन जगत से जुड़े कई जाने-पहचाने चेहरे मौजूद रहे।
एक ही शाम की कहानी पर आधारित ‘जिगसॉ’ में रणविजय (भरत दाभोलकर) की मुलाकात एक दौलतमंद कारोबारी की परेशान पत्नी आयरा (दामिनी चोपड़ा) से एक सुनसान घर में, बारिश से भीगी रात के दौरान होती है।
शुरुआत में यह मुलाकात एक सामान्य बातचीत जैसी लगती है, लेकिन जल्द ही घटनाएं एक बेचैन कर देने वाला मोड़ ले लेती हैं। दबे हुए राज़ सामने आने लगते हैं और दर्शकों के मन में यह सवाल उठने लगता है कि आखिर कौन कुछ छिपा रहा है और वास्तव में नियंत्रण किसके हाथ में है।
दाभोलकर, जो कॉमेडी, व्यंग्य और म्यूजिकल्स जैसी विभिन्न शैलियों में करीब 35 नाटक लिख और निर्देशित कर चुके हैं, ‘जिगसॉ’ का निर्देशन भी कर रहे हैं। थ्रिलर शैली में यह उनकी पहली कोशिश है। वहीं हिंदी फिल्मों और स्ट्रीमिंग प्रोजेक्ट्स में काम कर चुकी चोपड़ा ने अपने किरदार आयरा के अप्रत्याशित स्वभाव को आकार देने के लिए अभिनेत्री रोसामंड पाइक को प्रेरणा बनाया।
पहले दृश्य से लेकर आखिरी पल तक नाटक ने दर्शकों को बांधे रखा। जैसे ही दर्शक घटनाओं की एक संभावित तस्वीर पर पहुंचते, एक नया खुलासा उस पूरी धारणा को पलट देता।
दोनों किरदारों के बीच लगातार परिस्थितियों और नियंत्रण का पलड़ा बदलता रहा और यह सिलसिला आखिरी क्षणों तक जारी रहा।
दर्शकों की हंसी, चौंकने की आवाजें और तालियों से ठीक पहले छाई लंबी खामोशी इस बात का संकेत थी कि नाटक के ट्विस्ट और मोड़ अपने मकसद में पूरी तरह कामयाब रहे।
