मुख्य सामग्री पर जाएँ
मंगलवार, 22 सितंबर 2026 उदयपुर · 29°C
Headlines

कांग्रेस घास: विकास की राह में उगता एक अदृश्य संकट

एक छोटी-सी खरपतवार, लेकिन पर्यावरण, खेती और स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा

मुख्य बिंदु
  • सड़क किनारे, खाली भूखंडों, खेतों की मेड़ों और उपेक्षित जमीन पर उगती छोटी-सी सफेद फूलों वाली घास हमें अक्सर सामान्य वनस्पति दिखाई देती है।
  • मगर यही कांग्रेस घास, जिसे वैज्ञानिक रूप से पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस कहा जाता है, आज पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
  • इसे गाजर घास भी कहा जाता है।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) इसे अत्यंत आक्रामक खरपतवार मानता है।
  • कांग्रेस घास की सबसे बड़ी समस्या इसकी तेज वृद्धि और फैलाव है।
  • यह खेतों में फसलों के साथ पानी, प्रकाश, पोषक तत्व और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करती है, जिससे कृषि उत्पादकता प्रभावित होती है।
WAf𝕏TGin🖨
कांग्रेस घास: विकास की राह में उगता एक अदृश्य संकट

सड़क किनारे, खाली भूखंडों, खेतों की मेड़ों और उपेक्षित जमीन पर उगती छोटी-सी सफेद फूलों वाली घास हमें अक्सर सामान्य वनस्पति दिखाई देती है। मगर यही कांग्रेस घास, जिसे वैज्ञानिक रूप से पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस कहा जाता है, आज पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। इसे गाजर घास भी कहा जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) इसे अत्यंत आक्रामक खरपतवार मानता है।

कांग्रेस घास की सबसे बड़ी समस्या इसकी तेज वृद्धि और फैलाव है। यह खेतों में फसलों के साथ पानी, प्रकाश, पोषक तत्व और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करती है, जिससे कृषि उत्पादकता प्रभावित होती है। इसके बढ़ते फैलाव से स्थानीय वनस्पतियों और जैव-विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

इसका दूसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष मानव स्वास्थ्य है। इसके परागकण तथा पौधे के संपर्क से कुछ संवेदनशील लोगों में त्वचा संबंधी एलर्जी, डर्मेटाइटिस, नाक-आंखों में जलन और श्वसन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। पशुओं के लिए भी इसका अनियंत्रित फैलाव चिंता का विषय है।

विडंबना यह है कि जिस पौधे को हम रोज अपनी आंखों के सामने देखते हैं, उसके प्रति हमारी सामाजिक जागरूकता अभी भी सीमित है। केवल सरकारी अभियान या कृषि विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। विद्यालय, महाविद्यालय, ग्राम पंचायत, नगर निकाय, किसान संगठन और आम नागरिक—सभी को मिलकर इसके नियंत्रण में भागीदारी करनी होगी। ICAR भी सामुदायिक सहभागिता को इसके प्रभावी प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।

कांग्रेस घास के नियंत्रण में समय सबसे महत्वपूर्ण हथियार है। पौधे को फूल आने और बीज बनने से पहले हटाना अधिक प्रभावी माना जाता है, क्योंकि बीज बनने के बाद इसका फैलाव बहुत तेजी से बढ़ सकता है। हाथ से हटाते समय दस्ताने और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाना चाहिए, विशेषकर संवेदनशील व्यक्तियों को सीधे संपर्क से बचना चाहिए।

इसके नियंत्रण के लिए केवल एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय समन्वित खरपतवार प्रबंधन—यांत्रिक, सांस्कृतिक, जैविक तथा आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिक रासायनिक उपाय—अपनाए जाने चाहिए। ICAR के हालिया कार्यक्रमों में जैव-नियंत्रण, समय पर उखाड़ना तथा सुरक्षित जैविक उपयोग जैसे विकल्पों पर भी जोर दिया गया है।

कांग्रेस घास हमें एक बड़ा पर्यावरणीय संदेश देती है—प्रकृति में खालीपन कभी खाली नहीं रहता। जहां हमारी देखभाल समाप्त होती है, वहां आक्रामक प्रजातियां अपना स्थान बना सकती हैं। इसलिए स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण केवल वृक्ष लगाने से नहीं, बल्कि अवांछित एवं आक्रामक वनस्पतियों के वैज्ञानिक प्रबंधन से भी सुनिश्चित होगा।

आवश्यकता इस बात की है कि कांग्रेस घास को केवल खेत की समस्या न मानकर कृषि, स्वास्थ्य, जैव-विविधता और नागरिक जिम्मेदारी से जुड़ा साझा विषय माना जाए। यदि फूल आने से पहले इसकी पहचान, रोकथाम और सुरक्षित निष्कासन को जन-अभियान बना दिया जाए तो इसके विस्तार को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

कभी-कभी प्रकृति का सबसे बड़ा संकट किसी विशाल वृक्ष के रूप में नहीं, बल्कि सड़क किनारे उग आए एक छोटे-से पौधे के रूप में हमारे सामने होता है। कांग्रेस घास उसी अदृश्य संकट का संकेत है—जिसे समय रहते पहचानना और रोकना हम सभी की जिम्मेदारी है।

-सत्य भूषण शर्मा, उदयपुर (राजस्थान)