भूपाल नोबल्स पब्लिक स्कूल में स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सीबीएसई द्वारा निर्देशित “कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम – एनवायरनमेंटल एजुकेशन एंड कॉन्जर्वेशन रिसोर्सेज” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकों, एवं राजस्थान के विभिन्न विद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विद्यालय की प्राचार्या डॉ. सीमा नरूका ने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विषय नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जिम्मेदारी बन चुका है। उन्होंने बताया कि ऐसे सेमिनार शिक्षकों को नवीन शिक्षण विधियों से परिचित कराते हैं, जिससे वे विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित कर सकें।
सेमिनार के मुख्य अतिथि एवं वक्ता श्रीमती रश्मिंद्र कौर विरदी एवं श्री सैमुअल फ्रांसिस थे। दोनों विशेषज्ञों ने पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जल-संरक्षण, वृक्षारोपण, जैव विविधता तथा प्रदूषण नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी प्रदान की।
श्रीमती रश्मिंद्र कौर विरदी ने अपने संबोधन में कहा कि अध्यापकों को कक्षा शिक्षण के साथ-साथ विद्यार्थियों को प्रायोगिक गतिविधियों—जैसे वृक्षारोपण अभियान, जल संरक्षण परियोजनाएं, पुनर्चक्रण गतिविधियां, पोस्टर निर्माण एवं सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम—से जोड़ना चाहिए। इससे विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहकर व्यवहारिक रूप से भी पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी निभा सकेंगे।
सैमुअल फ्रांसिस ने सतत विकास की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि हमें आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण देना है, तो हमें आज ही जिम्मेदार व्यवहार अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि “सतत विकास तभी संभव है जब शिक्षा के माध्यम से पर्यावरण के प्रति सजग और संवेदनशील नागरिक तैयार किए जाएं।”
इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हनुमंत सिंह बोहेड़ा भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने प्रेरणादायक शब्दों में कहा, “पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस या कार्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे हमारी दैनिक जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है। विद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहीं से बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।” उन्होंने सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को छोटे-छोटे व्यवहारिक कदम उठाने के लिए प्रेरित करें, जैसे पानी की बचत, प्लास्टिक का कम उपयोग और अधिकाधिक वृक्षारोपण।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों, योजनाओं तथा स्थानीय स्तर पर किए जा सकने वाले ठोस प्रयासों के बारे में भी अवगत कराया गया। विशेषज्ञों ने विद्यालयों में पर्यावरण क्लबों के गठन, ‘ग्रीन कैंपस’ की अवधारणा को अपनाने तथा छात्रों को प्रकृति से जोड़ने वाली गतिविधियों को नियमित रूप से आयोजित करने पर बल दिया।
समापन सत्र में मुख्य अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर उनका सम्मान किया। कार्यक्रम का समापन संस्था गीत के साथ हुआ।
यह सेमिनार शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ तथा सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
