उदयपुर — भूपाल नोबल्स कॉलेज ऑफ फार्मेसी, उदयपुर में आयोजित विशेष संगोष्ठी एवं कार्यशाला में एसजीएसआईटीएस, इंदौर के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार माहेश्वरी ने "मिक्स्ड हाइड्रोट्रॉपी एवं इको-फ्रेंडली सॉल्यूबलाइजेशन तकनीक" पर विस्तृत व्याख्यान तथा प्रयोगात्मक वर्कशॉप संचालित की।
कार्यक्रम में उन्होंने पारंपरिक हानिकारक कार्बनिक सॉल्वेंट्स के विकल्प के रूप में ठोस, द्रव तथा गैसीय पदार्थों के मिश्रण पर आधारित रासायनिक पद्धतियों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
डॉ. माहेश्वरी ने बताया कि इस विधि से बेंजीन, मेथेनॉल, हेक्सेन, क्लोरोफॉर्म, कार्बन टेट्राक्लोराइड, फिनोल, डाई‑मेथाइल फॉर्मामाइड जैसे जहरीले सॉल्वेंट्स के उपयोग में कमी लाई जा सकती है, जिससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को घटाया जा सकेगा।
उनका कहना था कि ठोस पदार्थों को उपयुक्त रूप से तरलाकारित कर लिया जाए तो वे भी विलयन के विकल्प बन सकते हैं, जिससे फॉर्मुलेशन और एनालिटिकल प्रक्रियाओं में सस्टेनेबिलिटी और लागत में कमी संभव है।
प्रो. माहेश्वरी ने अपने शोध कार्यों का संक्षेप देते हुए कहा कि वे मिक्स्ड हाइड्रोट्रॉपी तथा मिक्स्ड सॉल्वेन्सी के क्षेत्र में अग्रणी हैं; इस विषय पर उनके 200 से अधिक शोध-पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं और वे देश-विदेश में 500 से अधिक व्याख्यान व 28 कार्यशालाएँ आयोजित कर चुके हैं।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह शोध शीघ्र ही भारतीय, ब्रिटिश और अमेरिकी फार्माकोपिया में स्थान पाएगा और खतरनाक रसायनों से मानवता व पर्यावरण को सुरक्षा मिलेगी।
कार्यक्रम का शुभारम्भ बीएन कॉलेज ऑफ फार्मेसी के डीन डॉ. युवराज सिंह सारंगदेवोत तथा प्राचार्य डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह नरूका ने किया और उन्होंने अतिथि का सम्मानपूर्वक स्वागत किया।
वर्कशॉप का संचालन प्रो. कमल सिंह राठौड़ ने किया।
इस अवसर पर डॉ. गिरधरपाल सिंह, डॉ. हितेश कोठारी, डॉ. मैना चौहान, अपर्णा अरोरा, प्रज्ञा पाटीदार, अन्नू राठौड़, दृष्टि चौहान, हरशीता कलाल, शिवांगी, नेहल जैन, चित्रेश सेनेचा सहित फार्म‑डी और बी.फार्म के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
