रविंद्र नाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज में नए प्रवेश लेने वाले छात्रों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ चिकित्सक एवं जल मित्र डॉक्टर पी सी जैन ने कहा कि आप भावी डॉक्टर के लिए यह मानव देह् एक साइलेंट टीचर है जिससे आपके संपूर्ण मानव शरीर की रचना का ज्ञान होगा जो आपके कुशल चिकित्सक बनने में पहली कक्षा है। जिस तरह हम अपने पहली कक्षा के अध्यापक का सम्मान करते हैं इस प्रकार इस मानव देह जो हमारा पहला अध्यापक है उसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज आपको दूसरे भगवान के रूप में देख ता है उसी अनुरूप अपने व्यक्तित्व का विकास आपको करना चाहिए।
जन्म से अभी तक प्लास्टिक हमारे जीवन
का अंग बन चुका है और उसका हमारे स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ रहा है इस पर
विस्तार से अपनी पी पी टी में डॉक्टर पी सी जैन ने बताया।
एक लकवा ग्रस्त व्यक्ति के क्लोट , खून के थक्के की माइक्रोस्कोप से जांच करने पर उसमें माइक्रो एवं
नैनोप्लास्टिक के कण मिले । जो यह दर्शाता है कि यह प्लास्टिक अब हमारे खून में भी
पहुंच चुका है। टूथब्रश, चाय की छलनी की जाली, डीप डीप चाय का बेग, स्क्रबर, बच्चों के खिलौने, नॉन स्टिक तवा सब में प्लास्टिक माइक्रो या नैनो प्लास्टिक उपलब्ध है जो हमारे
शरीर में धीमे-धीमे जाता रहता है। यह हमारे हार्ट, खून की नलियां, लिवर, लड़कियों में ओवरी, लड़कों में टेस्टिस में प्रवेश कर
जाते हैं। मां के दूध में भी माइक्रो प्लास्टिक नैनो प्लास्टिक अब मिला है।
लड़कियों में जल्दी माहवारी आना, पी सी ओ ऐस, बच्चा बच्ची ना पैदा कर पाना, और लड़कों में स्पर्म ना पैदा कर पाना
की वजह से बच्चे बच्ची नहीं पैदा हो रहे हैं और उनको आईवीएफ का सहारा लेना पड़ता
है। अपनी रसोई कैसे होनी चाहिए इसका सजीव चित्रण अपने पी पी टी में छात्रों को दिखाया। जहां तक संभव हो वहां तक रसोई में
स्टील और तांबे का बर्तनों का उपयोग करना चाहिए। एक लघु नाटिका के माध्यम से खेलते
हुए बच्चे किस तरह से प्लास्टिक के खिलौने मुंह में खाते हैं यह दिखाया। पानी को प्लास्टिक भी प्रदूषित कर रहा है जिसकी हानि जल जीव एवं मनुष्य को भी हो रही है। डॉक्टर जैन
ने पूजा सामग्री जो केमिकल या प्लास्टिक से बने हो उसे जल में न प्रवाहित करने का
निवेदन किया है।
संयुक्त राष्ट्र विश्व मौसम विज्ञान संगठन( वमो) की चेतावनी के अनुसार "हम
पृथ्वी के संचित जल भंडार को तेजी से खाली कर रहे हैं।" रिपोर्ट में
पृथ्वी के कुल मीठे पानी के भंडार मैं लगातार एक दशक से जारी गिरावट को रेखांकित
किया गया है जिसमें भूजल, हिमनद , हिमाचल,, मृदा आद्रता सम्मिलित है। और जो मीठा पानी उपलब्ध है उसे भी प्रदूषित कर रहे
हैं। नाटिकाओं यशंशी,मनस्वी ,निधिगुप्ता ,खुशी ,यशांशी,निकिता ,अनुज ,रोहित ,संकल्प विद्यार्थी सम्मिलित थे।
प्रभारी डॉक्टर पूजा था भाई, एवं डॉ पल्लवी दुबे ने डॉ पी सी जैन का स्वागत एवं धन्यवाद अर्पित किया।।
