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विश्व स्ट्रोक दिवस: हर मिनट है महत्वपूर्ण, स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही मरीज को पहुंचाएं अस्पताल

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एक वर्ष में 113 मरीजों को दिया गया थ्रॉम्बोलाइसिस उपचार, युवाओं में भी बढ़ रहा स्ट्रोक का खतरा

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विश्व स्ट्रोक दिवस: हर मिनट है महत्वपूर्ण, स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही मरीज को पहुंचाएं अस्पताल

उदयपुर । विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, उदयपुर ने आमजन से स्ट्रोक के लक्षणों को समय रहते पहचानने और तुरंत अस्पताल की आपातकालीन सेवा में पहुंचने की अपील की है।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रोक के उपचार में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है।

समय पर उपचार मिलने से मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को कम करने के साथ आजीवन विकलांगता के खतरे को भी घटाया जा सकता है।सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. तरुण कुमार रालोत ने बताया कि स्ट्रोक अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है।

धूम्रपान, शराब का सेवन, मोटापा, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे कारणों से युवाओं में भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ रहा है।एक वर्ष में 113 मरीजों को दिया विशेष उपचारअस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में स्ट्रोक के 113 मरीजों को थ्रॉम्बोलाइसिस उपचार दिया गया।

अस्पताल की आपातकालीन सेवा में प्रतिदिन तीन से चार संभावित स्ट्रोक रोगी पहुंचते हैं। समय सीमा के भीतर अस्पताल पहुंचने वाले उपयुक्त मरीजों को थ्रॉम्बोलाइसिस उपचार दिया जाता है।

इस प्रक्रिया में रक्त वाहिकाओं में बने थक्के को घोलने के लिए विशेष दवाओं का उपयोग किया जाता है, जिससे मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलती है।

देरी से अस्पताल पहुंचने पर उपचार के विकल्प सीमित हो सकते हैं और लंबे समय तक विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है।फास्ट पद्धति से पहचानें स्ट्रोक के लक्षणडॉ. रालोत ने बताया कि स्ट्रोक के लक्षणों को फास्ट पद्धति से आसानी से पहचाना जा सकता है।

इसमें चेहरे का एक तरफ लटक जाना या मुंह टेढ़ा होना, एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी अथवा सुन्नपन आना, बोलने में परेशानी होना या बात समझने में कठिनाई होना प्रमुख लक्षण हैं।

इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर समय गंवाए बिना मरीज को नजदीकी स्ट्रोक उपचार की सुविधा वाले अस्पताल की आपातकालीन सेवा में पहुंचाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि यदि लक्षण कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाएं, तब भी चिकित्सकीय जांच के लिए तुरंत अस्पताल पहुंचना आवश्यक है।

लक्षणों के ठीक होने का इंतजार करना खतरनाक साबित हो सकता है।अनियमित जीवनशैली से युवाओं में बढ़ रहा खतराअनियमित दिनचर्या, अत्यधिक तनाव, धूम्रपान, नशे की लत, अधिक नमक और चीनी का सेवन, तला-भुना भोजन, मोटापा, अनियंत्रित कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप और मधुमेह स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारक हैं।

नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और रक्तचाप, मधुमेह एवं कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण रखकर स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है।अस्पताल में उपलब्ध हैं समन्वित उपचार सुविधाएंसुपर स्पेशलिटी अस्पताल में स्ट्रोक रोगियों के उपचार के लिए न्यूरोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और पुनर्वास विशेषज्ञों की समन्वित टीम उपलब्ध है।

आधुनिक जांच तकनीकों से यह पता लगाया जाता है कि स्ट्रोक रक्त वाहिका में थक्का बनने के कारण हुआ है या मस्तिष्क में रक्तस्राव के कारण।

इसके आधार पर उपचार निर्धारित किया जाता है, क्योंकि थक्का घोलने वाली दवाएं केवल निर्धारित परिस्थितियों में ही दी जा सकती हैं।न्यूरोसर्जन मस्तिष्क में रक्तस्राव, बढ़ते दबाव और अन्य गंभीर स्थितियों में आवश्यक शल्य चिकित्सा करते हैं।

वहीं, पुनर्वास टीम शारीरिक व्यायाम, दैनिक गतिविधियों के प्रशिक्षण और वाणी चिकित्सा के माध्यम से मरीज को दोबारा चलने, बोलने और सामान्य जीवन जीने में मदद करती है।

स्ट्रोक के बाद होने वाली चिंता, अवसाद, नींद और स्मृति संबंधी समस्याओं के समाधान में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।