उदयपुर। परिधान एवं वस्त्र विज्ञान विभाग, सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा दिनांक 28–30 सितंबर 2026 तक परंपरागत लिप्पन कला पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
लिप्पन कला गुजरात के कच्छ क्षेत्र की प्रसिद्ध पारंपरिक सजावटी कला है, जिसमें मिट्टी एवं दर्पणों के माध्यम से आकर्षक ज्यामितीय एवं लोक-प्रेरित आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय पारंपरिक कला एवं शिल्प से परिचित कराते हुए उनकी रचनात्मकता, कलात्मक अभिव्यक्ति तथा व्यावहारिक कौशल का विकास करना था।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को लिप्पन कला की मूल तकनीक, डिजाइन निर्माण, दर्पण सज्जा तथा विभिन्न सजावटी उत्पादों पर इसके प्रयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
इस अवसर पर डॉ. सरला लखावत, डीन, सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय, ने विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला परंपरा, रचनात्मकता और कौशल विकास के सुंदर समन्वय का सफल उदाहरण हैं।
कार्यशाला का सफल समन्वय विभागाध्यक्ष डॉ. रूपल बाबेल द्वारा किया गया । उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनके कौशल, सृजनात्मकता एवं नवाचार को बढ़ावा देती हैं।
आयोजन समिति में भूमिका, कृतिका, स्नेहा, दक्षा, नम्रता, भावना, आरती एवं मालदिनी का सक्रिय सहयोग रहा।
