उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में श्री राम लीला समिति के तत्वावधान में निम्बार्क महाविद्यालय प्रांगण में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला का पांचवां दिन श्रद्धालुओं के लिए एक अलौकिक आत्मानुभूति का गवाह बना।
एक ही शाम को जहां श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के विवाह का परम उल्लास मनाया, वहीं अगले ही क्षण प्रभु के वन गमन की निष्ठुर वेदना ने पूरे वातावरण को कारुणिक कर दिया।
राम बारात के उल्लास से राम वन गमन के वैराग्य तक के प्रसंगों ने एक ही दिन में श्रद्धालुओं को अश्रु, उल्लास और करुणा के रस में भिगो दिया।उल्लास का आरंभ संध्या छह बजे शहर के प्रसिद्ध अस्थल मंदिर से प्रभु श्रीराम की भव्य बारात से हुआ।
'राम-लखन-जानकी, जय बोलो हनुमान की' के गगनभेदी जयकारों से समूचा मार्ग गुंजायमान हो उठा। ढोल-नगाड़ों की ताल और राजस्थान के पारंपरिक थाली-मांदळ की गूंज पर नाचते-गाते श्रद्धालु सूरजपोल होते हुए निम्बार्क महाविद्यालय रामलीला प्रांगण पहुंचे।
वहां घराती बने स्थानीय श्रद्धालुओं ने बाराती श्रद्धालुओं का पलक-पावड़े बिछाकर आत्मीय स्वागत किया।रामलीला प्रांगण में प्रभु श्रीराम का दूल्हे के रूप में पारंपरिक लोकाचार से पूजन किया गया।
मंच पर जब श्री राम-जानकी विवाह का पावन प्रसंग हुआ, तो उपस्थित जनसमूह भक्तिभाव से झूम उठा।
कन्यादान की वेला में श्रद्धालुओं ने अश्रुपूरित नयनों और अपार श्रद्धा के साथ अपनी-अपनी सामर्थ्य अनुसार कन्यादान अर्पण किया।मंगलमय आनंद के बाद वन गमन की वेदना—नियति के चक्र ने उल्लास के पलों को पलभर में विरह और वेदना में बदल दिया।
विवाह के मंगलमय प्रसंग के तुरंत बाद मंच पर माता कैकयी के कठोर वरदान, महाराज दशरथ की विवश प्रतिज्ञा और मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के 14 वर्षों के वन गमन का हृदयविदारक मंचन शुरू हुआ।जब प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण राजसी वस्त्र त्यागकर वल्कल धारण कर अवधपुरी से विदा होने लगे, तो महाराज दशरथ के हाहाकार और अयोध्यावासियों के आर्तनाद से पूरा प्रांगण स्तब्ध रह गया।
एक ही शाम को पहले विवाह का आनंद और फिर क्षण भर बाद वन गमन की निष्ठुर वेदना देखकर प्रांगण में मौजूद हर श्रद्धालु का मन मर्माहत हो उठा और सैकड़ों आंखें बरबस बह निकलीं।वृंदावन के पुष्टिमार्गीय श्री कृष्ण लीला संस्थान के वेदप्रकाश भारद्वाज और घनश्याम शर्मा के सान्निध्य में 40 कलाकारों ने अपने जीवंत और प्रभावकारी अभिनय से भक्ति, करुणा, वियोग और वैराग्य की ऐसी सरिता प्रवाहित की कि संपूर्ण वातावरण पूरी तरह राममय हो गया।सेल्फी लेने की भी होड़-आज के हाई-टेक दौर में भला युवा पीढ़ी कैसे पीछे रहती।
अस्थल मंदिर से लेकर निम्बार्क महाविद्यालय तक निकली राम बारात में इस बार भक्ति और आधुनिकता का फ्यूजन भी देखने को मिला।
जब रथ पर विराजे राम-लखन और जानकी के स्वरूप आगे बढ़ रहे थे, तो सड़क के दोनों किनारों पर खड़े युवाओं में इन दिव्य पन्नों को अपने स्मार्टफोन के कैमरे में कैद करने की होड़ सी मच गई।
किसी ने रील बनाने के लिए स्टेटस अपडेट किया, तो किसी ने 'हम भी प्रभु श्रीराम के बाराती' कैप्शन के साथ तुरंत इंस्टाग्राम पर स्टोरी ठोक दी।
'एक सेल्फी तो बनती है बॉस' वाले क्रेज ने इस ऐतिहासिक बारात में चार चांद लगा दिए, जहां श्रद्धा भी थी और सोशल मीडिया का टशन भी।न कोई शुल्क, न कोई प्रवेश पत्र — जोशी-श्रीराम लीला समिति के अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने आगंतुक श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि लम्बे समय बाद पहली बार दस दिवसीय रामलीला का मंचन शहरवासियों को आनंदित ही नहीं कर रहा, बल्कि प्रभु श्रीराम की भक्ति से सराबोर भी कर रहा है।
लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए बैठक व्यवस्था प्रतिदिन बढ़ाई जा रही है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला देखने के लिए न तो कोई शुल्क है, न कोई प्रवेश पत्र।
उन्होंने हर रामभक्त से रामलीला में पधारने का अनुरोध किया।गणमान्य अतिथियों का सम्मान-समिति के महासचिव भंवरलाल शर्मा ने बताया कि रामलीला में पधारे गणमान्य अतिथिगण बड़ीसादड़ी गोपाल सत्संग आश्रम के स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज, कर्नल अनुराग मोहन भट्ट, राज्यपाल के सलाहकार प्रो. कैलाश सोडाणी, राजस्थान विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत, एमपीयूएटी के पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर शर्मा, महेश सेवा समिति के अध्यक्ष देवेंद्र मालीवाल, जिला कोषाधिकारी दिग्विजयसिंह झाला, प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना, पूर्व राज्य मंत्री जगदीशराज श्रीमाली, पूर्व नेता प्रतिपक्ष दिनेश श्रीमाली, विहिप चित्तौड़ प्रांत के धर्माचार्य सम्पर्क प्रमुख बसंत चौबीसा, फतहनगर से कैलाश अग्रवाल (अनमोल), कैलाश खंडेलवाल का सम्मान किया गया।अतिथियों का सम्मान समिति के विप्र फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र पालीवाल, समन्वयक अशोक बाबेल, हरीश मारवाड़ा, प्रवक्ता कौशल मूंदड़ा, चेतन माली, चैनशंकर दशोरा, धरणीधर तिवारी, जगन्नाथ शर्मा, दुर्गेश सुखवाल, गजेंद्र चौबीसा, निर्मल चौबीसा, दीपक डांगी, अरुण त्रिवेदी, एडवोकेट दिनेश गुप्ता, राकेश पालीवाल आदि कार्यकर्ताओं ने किया।राम साक्षात धर्म आदर्श मानव आचरण हैं - सुदर्शनाचार्य-इस अवसर पर सुदर्शनाचार्य महाराज ने कहा कि राम केवल मानव, युवराज, राजा मात्र नहीं, साक्षात धर्म हैं, आदर्श आचरण हैं।बुधवार को श्रीराम-केवट संवाद-संयोजक डॉ. विजय प्रकाश विप्लवी ने बताया कि 14 अक्टूबर को श्रीराम-केवट संवाद, दशरथ मरण और भरत मिलन के प्रसंग होंगे।
15 अक्टूबर को श्रीरामजी का ऋषियों से मिलन, गिद्धराज जटायु, शूर्पणखा नासिका भंग, खर-दूषण वध तथा सीता हरण का मंचन किया जाएगा।
