उदयपुर, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में धर्मसभा का आयोजन हुआ। डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि भगवान ऋषभदेव अनंत गुणों के धनी हैं, इसलिए उन्हें गुणों का सागर कहा जाता है।
प्रभु के गुणों का गान, स्मरण और चिंतन आत्मा को संसार रूपी भवसागर से पार उतरने का मार्ग दिखाता है।उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आंधी-तूफान के बीच समुद्र की ऊंची लहरों को केवल भुजाओं के बल पार करना कठिन है, उसी प्रकार संसार मोह रूपी जल से भरा है, जिसमें क्रोध, मान, माया और लोभ के बवंडर उठते रहते हैं।
प्रभु की वंदना और गुण स्मरण आत्मा को सही दिशा प्रदान करते हैं।धर्मसभा में शिवाचार्य भगवंत के 85वें जन्म वसंत पर श्रद्धालुओं ने वंदन किया।
प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि आचार्य श्री ध्यानयोग, तपयोग एवं साधना के माध्यम से समाज और विश्व को अध्यात्म का संदेश दे रहे हैं।इस अवसर पर डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने ध्यान के विशेष प्रयोग करवाए।
संघ अध्यक्ष रोशन लाल जैन एवं हिम्मत बड़ाला ने आचार्य श्री के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। बाहर से आए समाजसेवियों का सम्मान किया गया।
अंत में भक्तामर पाठ के लाभार्थी परिवार की ओर से श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।