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दिखावे की जिंदगी छोड़ आत्मा की सुंदरता पहचानें, भीतर की खुशी ही सच्ची मुस्कानःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में बुधवार को आयोजित नियमित धर्मसभा में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को धर्म संदेश देते हुए कहा कि परमात्मा महावीर ने केवलज्ञान प्राप्त कर जिनशासन की स्थापना

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उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में बुधवार को आयोजित नियमित धर्मसभा में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को धर्म संदेश देते हुए कहा कि परमात्मा महावीर ने केवलज्ञान प्राप्त कर जिनशासन की स्थापना की और संसार के जीवों में स्वयं को जानने तथा आत्मचेतना को पहचानने की प्यास जगाई।

जीवन में यह प्यास पैदा होना बेहद जरूरी है। प्यास जितनी गहरी होगी, पानी का महत्व उतना ही अधिक समझ में आएगा।साध्वीश्री ने कहा कि आज मनुष्य बाहरी सुंदरता के पीछे भाग रहा है, लेकिन अपनी आंतरिक चेतना को पहचानने का प्रयास नहीं कर रहा।

बाजार में सौंदर्य प्रसाधनों की बढ़ती मांग इसी मानसिकता को दर्शाती है। हमें विचार करना चाहिए कि हम वास्तव में सुंदर बनना चाहते हैं या केवल सुंदर दिखना चाहते हैं?

हर व्यक्ति दूसरों के सामने अच्छा दिखने का प्रयास कर रहा है, जबकि वास्तविक आवश्यकता भीतर से अच्छा बनने की है।

जैसे हैं, वैसे स्वीकार करने के बजाय हम रोज वैसा बनने की कोशिश करते हैं, जैसे वास्तव में हैं ही नहीं।साध्वीश्री ने मानव जीवन की अनमोलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परमात्मा की असीम कृपा से हमें यह दुर्लभ मानव जीवन मिला है, लेकिन मनुष्य को अपनी उम्र लंबी होने का भ्रम रहता है।

जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव के बीच हमें अपने समय का उपयोग आत्मकल्याण, सद्बुद्धि और अच्छे संस्कारों के लिए करना चाहिए। मन को कोरे कागज की तरह निर्मल रखना चाहिए, ताकि उसमें अच्छे विचारों को स्थान मिल सके।

धर्मसभा में साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत किया।