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Udaipur News

विप्र फाउंडेशन एवं सहस्र औदिच्य समाज की संयुक्त पहल

60 से अधिक विप्र प्रतिभाओं का सम्मान, आरएएस मार्गदर्शन से युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं के लिए किया अभिप्रेरित

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विप्र फाउंडेशन एवं सहस्र औदिच्य समाज की संयुक्त पहल

उदयपुर। विप्र फाउंडेशन के शिक्षा, रोजगार एवं प्रतियोगी परीक्षा प्रकोष्ठ तथा सहस्र औदिच्य समाज के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को नवी धर्मशाला, सेक्टर-14 में इस वर्ष के द्वितीय विप्र प्रतिभा सम्मान समारोह एवं आरएएस परीक्षा निःशुल्क मार्गदर्शन सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया।

समारोह में कक्षा 12वीं, स्नातक, स्नातकोत्तर एवं विभिन्न डिग्री-डिप्लोमा परीक्षाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित करने वाली 50 से अधिक विप्र प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।

साथ ही विप्र समाज के युवाओं की राज्य एवं केंद्र सरकार की उच्च प्रशासनिक सेवाओं में सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से आरएएस अभ्यर्थियों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया गया।कार्यक्रम में उदयपुर शहर के साथ दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों एवं अन्य जिलों से विप्र विद्यार्थी अपने अभिभावकों सहित उत्साहपूर्वक सम्मिलित हुए।

जिला शिक्षा, रोजगार एवं प्रतियोगी परीक्षा प्रकोष्ठ के मुख्य जिला प्रभारी डॉ. मनीष श्रीमाली ने मंचस्थ अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन के उद्देश्यों एवं समाज में शैक्षणिक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि आरएएस अधिकारी श्रीमती लतिका पालीवाल एवं विशिष्ट अतिथि आरएएस अधिकारी अशोक गौड़ रहे।

अध्यक्षता सहस्र औदिच्य समाज उदयपुर की अध्यक्षा इंदिरा शर्मा ने की। दोनों प्रशासनिक अधिकारियों ने आरएएस परीक्षा की तैयारी, अध्ययन रणनीति, पाठ्यक्रम की समझ, उत्तर लेखन एवं साक्षात्कार की प्रभावी तैयारी के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।

अभ्यर्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा प्रशासनिक सेवा में सफलता के लिए लक्ष्य निर्धारण, अनुशासित अध्ययन एवं निरंतर अभ्यास की महत्ता प्रतिपादित की।विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति सदस्य एवं शिक्षा, रोजगार एवं प्रतियोगी परीक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक डॉ. एच. आर. दवे ने अपने उद्बोधन में विप्र समाज के युवाओं की प्रशासनिक सेवाओं सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सहभागिता बढ़ाने के लिए प्रकोष्ठ द्वारा किए जा रहे प्रयासों एवं उनसे लाभान्वित विद्यार्थियों की उपलब्धियों की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि प्रतिभाओं का सम्मान एवं गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन समाज के शैक्षणिक सशक्तीकरण तथा युवा पीढ़ी के भविष्य निर्माण की आधारशिला है।महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु डॉ. उमाशंकर शर्मा ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को विषय एवं संकाय चयन के संबंध में मार्गदर्शन देते हुए कहा कि “संकाय चयन भविष्य निर्माण की प्रथम सीढ़ी है।” उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि, योग्यता एवं भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप विषय चयन करने का सुझाव दिया।शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव गणेश नागदा ने कार्यक्रम का प्रभावी संचालन करते हुए बताया कि शिक्षा प्रकोष्ठ के मार्गदर्शन से गत वर्ष 13 एवं इस वर्ष 8 विप्र विद्यार्थियों का आरएएस परीक्षा में चयन हुआ है।

इसके अतिरिक्त 10 विद्यार्थियों का असिस्टेंट प्रोफेसर, 3 का कॉलेज व्याख्याता एवं 3 का कॉलेज लाइब्रेरियन पदों पर चयन हुआ है। भावना व्यास ने प्रतिभा सम्मान समारोह के संचालन में सहयोग प्रदान किया।

प्रणय जानी ने डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में विप्र विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध ऑनलाइन पाठ्यक्रमों एवं प्रशिक्षण सुविधाओं की जानकारी देते हुए रियायती दरों पर डिजिटल कोर्स उपलब्ध करवाने की पहल से अवगत कराया।विप्र फाउंडेशन जोन-1ए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र पालीवाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा प्रकोष्ठ एवं सहस्र औदिच्य समाज की यह संयुक्त पहल समाज के शैक्षणिक विकास की दिशा में सराहनीय प्रयास है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विप्र समाज के विभिन्न घटक भविष्य में भी इस प्रकार के साझा आयोजन कर समाज को नई दिशा प्रदान करेंगे।सहस्र औदिच्य समाज की अध्यक्षा इंदिरा शर्मा ने कहा कि प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं के लिए आयोजित ऐसे जागरूकता एवं मार्गदर्शन कार्यक्रम निश्चित रूप से समाज के विद्यार्थियों को लाभान्वित करेंगे तथा युवाओं में उच्च लक्ष्य प्राप्ति की प्रेरणा जागृत करेंगे।कार्यक्रम में दिनेश शुक्ला, नीरज नागदा, राजेश पालीवाल, अनुराग त्रिपाठी, डॉ. रश्मि बोहरा, लीलाधर नागदा, प्रदीप गर्ग, सुशील वशिष्ठ, डॉ. मनीष तिवारी एवं महेंद्र आमेटा, जय प्रकाश श्रीमाली, केशव व्यास सहित अनेक पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सहस्र औदिच्य समाज से दिलीप व्यास, राहुल व्यास एवं सह सचिव डॉ. योगेश जानी सहित समाज के गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।समारोह के माध्यम से “प्रतिभा सम्मान से प्रतिभा निर्माण तथा सामान्य विद्यार्थी से प्रशासनिक सेवा की ओर” की संकल्पना को साकार करने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम के अंत में दीपिका मेनारिया ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, अभिभावकों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।