पंचगव्य आधारित प्राकृतिक कृषि एवं भूमि की उर्वरता संरक्षण टिकाऊ कृषि का आधार — डॉ. दिलीप कुमार किसानों का हित, युवाओं का नवाचार और विश्वविद्यालय की आत्मनिर्भरता सर्वोच्च प्राथमिकता - डॉ. प्रताप सिंह उदयपुर, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर का 27वाँ स्थापना दिवस समारोह रविवार को राजस्थान कृषि महाविद्यालय स्थित महाराणा प्रताप सभागार में उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया।
डॉ. दिलीप कुमार एमपीयूएटी के 27 वें स्थापना दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। समारोह की अध्यक्षता एमपीयूएटी के कुलगुरू डॉ. प्रताप सिंह ने की।
डॉ. दिलीप कुमार, मुख्य अतिथि एवं क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय जनसंचार संस्थान, जम्मू ने अपने उद्बोधन में कहा कि महाराणा प्रताप की इस पावन धरा पर उनके आदर्शों एवं प्रताप को स्मरण करना गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि भारत आज कृषि उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें किसानों एवं कृषि वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान है।
कृषि का सीधा संबंध प्रकृति से है, इसलिए कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में प्रकृति के संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने पंचगव्य आधारित प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने तथा भूमि की उर्वरता बनाए रखने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को ऐसे युवा तैयार करने चाहिए, जो किसान परिवारों से जुड़कर कृषि क्षेत्र में नवाचार एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दें।
उन्होंने विश्वविद्यालय में नक्षत्र वाटिका स्थापित करने का सुझाव भी दिया। विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, आत्मविश्वास, आत्मसम्मान एवं आत्मबोध के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, संस्कारों के विकास और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला केंद्र है।
कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक, मानव संसाधन विकास, डॉ. शांति कुमार शर्मा ने अतिथि के रूप में उद्बोधन दिया।
डॉ. शांति कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों में भी विश्वविद्यालय द्वारा उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करना सराहनीय है। उन्होंने राजस्व सृजन, सुशासन क्षमता, मानव कौशल विकास एवं ई-गवर्नेंस को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।
साथ ही, विद्यार्थियों के स्टार्टअप को प्रोत्साहन, शिक्षकों में नवाचार तथा शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता बताई।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरु डॉ. कैलाश डांगा ने कहा कि महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय का संबंध एक ही परिवार के सदस्यों के समान है।
महाराणा प्रताप के नाम पर विश्वविद्यालय का नामकरण हम सभी के लिए गौरव एवं प्रेरणा का विषय है। उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आधुनिक तकनीक, कृषि नवाचार, उन्नत खेती एवं पशुपालन को बढ़ावा देने पर बल दिया।
साथ ही, किसानों की आय में वृद्धि तथा कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विश्वविद्यालयों के बीच आपसी सहयोग एवं समन्वय को आवश्यक बताया।
प्रो. बी.एल. चौधरी, सम्मानित अतिथि, पूर्व कुलपति, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर ने कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए उसकी पहचान कर सामूहिक प्रयास करना आवश्यक है।
उन्होंने बीटी कॉटन, मक्का में कीटों के प्रकोप एवं विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याओं के व्यावहारिक समाधान पर जोर दिया।
उन्होंने कुलगुरु से विद्यार्थियों के हित में प्राध्यापकों की कमी दूर करने हेतु आवश्यक कदम उठाने तथा पेंशनर्स की समस्याओं के समाधान पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि सीमित मानव संसाधन के बावजूद विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सैनिकों की भांति समर्पण एवं टीम भावना से कार्य करना चाहिए।
साथ ही, कर्मचारियों के अच्छे कार्यों की सराहना एवं उनका उत्साहवर्धन भी आवश्यक है।
उन्होंने वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं सेवानिवृत्त विशेषज्ञों से आपसी समन्वय द्वारा उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने तथा समस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने का आह्वान किया, ताकि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा एवं गौरव में वृद्धि हो सके।
प्रोफेसर कैलाश सोडाणी, अति विशिष्ट अतिथि, पूर्व कुलपति, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा एवं राज्यपाल के सलाहकार ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान के लिए स्थापना दिवस अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
यह संस्थान की विगत वर्षों की उपलब्धियों एवं विकास कार्यों के मूल्यांकन के साथ भविष्य की चुनौतियों और योजनाओं पर विचार करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार के क्षेत्र में निरंतर महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
देश को आत्मनिर्भर बनाने तथा विकास की गति बनाए रखने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं ऑटोमेशन को चुनौती नहीं, बल्कि भविष्य के नए अवसरों के रूप में अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने शिक्षण संस्थानों को ज्ञान आधारित व्यवस्था विकसित करने तथा आधुनिक तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता बताई। साथ ही, रोजगारोन्मुखी शिक्षा, उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने पर बल दिया।
कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस केवल अतीत की उपलब्धियों को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करने और संस्थान को उत्कृष्टता की ओर ले जाने का संकल्प लेने का दिन है।
उन्होंने विगत वर्ष की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए IFMS 2.0 के क्रियान्वयन, कर्मचारियों की वेतन एवं पेंशन संबंधी समस्याओं के समाधान तथा विश्वविद्यालय को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया।
उन्होंने इस वर्ष विश्वविद्यालय की आय में 25 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित करने की जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से सामूहिक प्रयासों द्वारा स्थानीय समस्याओं के समाधान का आह्वान किया।
साथ ही युवाओं को कृषि आधारित स्टार्टअप एवं उद्यमिता अपनाने, वैज्ञानिकों को नवाचार एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक सहयोग से विश्वविद्यालय नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।
समारोह का शुभारंभ महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि, दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर राजस्थान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. लोकेश गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों, रेडियो स्टेशन, कृषि में ड्रोन तकनीक, स्मार्ट विलेज परियोजना के तहत सात गाँवों को गोद लेने, नैतिक मूल्यों के संवर्धन तथा किसानों तक नवीन तकनीकों के हस्तांतरण की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने NCC इकाई की उपलब्धियों की सराहना करते हुए नंदिनी नागदा, खुशी नागदा एवं वैशाली मीणा की विशेष उपलब्धियों का उल्लेख किया।
संकाय सदस्यों एवं किसानों को सम्मान इस अवसर पर विश्वविद्यालय के तीन वैज्ञानिकों—डॉ. एन.एल. पंवार, डॉ. विनोद सहारण एवं डॉ. देवेंद्र जैन को विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान प्राप्त करने पर विशिष्ट सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया गया।
साथ ही, जैविक खेती, सब्जी एवं फूल उत्पादन, फलोद्यान, देशी गोवंश संवर्धन, एकीकृत कृषि प्रणाली, पौध नर्सरी एवं महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय नवाचार करने वाले 13 प्रगतिशील जनजाति किसानों को भी सम्मानित किया गया।
इनमें बांसवाड़ा की श्रीमती खातु बाई एवं श्रीमती जेमल बेन, प्रतापगढ़ के श्री बालूराम मीणा एवं श्रीमती पंकज देवी मीणा, सलूम्बर की श्रीमती धापू बाई मीणा, श्री गौतम लाल मीणा एवं श्रीमती नवल बाई मीणा तथा उदयपुर के श्रीमती मोती देवी मीणा, श्री प्रेमचंद दामा, श्री सोमराज, श्री खेमाराम, श्री धावनचंद एवं श्री ललाराम शामिल हैं।
पुस्तकों का विमोचन कार्यक्रम में कुलगुरु एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा लिखित पुस्तकों, पुस्तिकाओं एवं तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन किया गया।
इनमें प्रमुख रूप से डॉ. हरि सिंह एवं अन्य द्वारा लिखित पुस्तिका ‘दक्षिणी राजस्थान में कृषि प्रणाली से संबंधित सफल मॉडल एवं प्रेरक कहानियाँ’, ‘उदयपुर एवं भीलवाड़ा के किसानों द्वारा फसल विविधीकरण के सफल प्रयास’ तथा समन्वित कृषि प्रणाली आधारित सतत आजीविका मॉडल’ शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, डॉ. मंजीत सिंह एवं अन्य द्वारा तैयार तकनीकी बुलेटिन ‘Hydroponic Cultivation in Polyhouse’ का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर शर्मा, पूर्व अधिष्ठाता डॉ. वी.एन. जोशी, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आर.एल. सोनी, डॉ. विनोद यादव, कुलसचिव श्री अशोक कुमार, श्री महेन्द्र सिंह सिमार, डॉ. राजश्री उपाध्याय, डॉ. प्रकाश पंवार, डॉ. सिद्धार्थ मिश्रा, डॉ. आर.एच. मीणा, डॉ. सरला लखावत, डॉ. विक्रमादित्य दवे एवं कोटा के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. महेन्द्र सिंह सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न अधिकारी, वैज्ञानिक, संकाय सदस्य, कर्मचारी, विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. विशाखा बंसल ने किया तथा अंत में उन्होंने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
समारोह का समापन राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।
