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श्रावणी पूर्णिमा की महिमा बताते हुए पूर्ण हुई ‘अपनों से अपनी बात’ शिव कथा

उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान में संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के श्रीमुख से भोलेनाथ के चरणों में चल रही ‘अपनों से अपनी बात’ शिव कथा की

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श्रावणी पूर्णिमा की महिमा बताते हुए पूर्ण हुई ‘अपनों से अपनी बात’ शिव कथा

उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान में संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के श्रीमुख से भोलेनाथ के चरणों में चल रही ‘अपनों से अपनी बात’ शिव कथा की गुरुवार को भावपूर्ण पूर्णाहुति हुई। कथा के समापन अवसर पर उन्होंने श्रावणी पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर्व की महिमा बताते हुए कहा कि रक्षा सूत्र केवल कलाई पर बंधा धागा नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और दिए गए वचन को निभाने का संकल्प है।

प्रशांत अग्रवाल ने देवासुर संग्राम का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि इंद्राणी ने इंद्र को रक्षा सूत्र बांधा था। यह सूत्र उनके लिए भय से मुक्ति और विजय का आधार बना।

इसके बाद उन्होंने राजा बलि और भगवान वामन की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि कठोर तप से तीनों लोकों के राजा बने बलि अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध थे।

यज्ञ के दौरान भगवान विष्णु वामन रूप में उनके पास पहुंचे और तीन पग भूमि मांगी। गुरु शुक्राचार्य ने बलि को भगवान की लीला से अवगत कराया, लेकिन बलि ने कहा कि जब स्वयं भगवान याचक बनकर आए हैं तो उन्हें खाली हाथ लौटाना उचित नहीं होगा।

वामन भगवान ने दो पग में पृथ्वी और आकाश नाप लिया। तीसरे पग के लिए बलि ने अपना शीश आगे कर दिया।

भगवान ने उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया और भविष्य में इंद्र के समान ऐश्वर्य का आशीर्वाद दिया। बलि ने भगवान विष्णु से अपने द्वारपाल बनने का वरदान मांग लिया।

जब माता लक्ष्मी को इसका पता चला तो उन्होंने राजा बलि को राखी बांधकर भाई बनाया और भगवान विष्णु को मुक्त कराया।

उन्होंने कहा कि यह रक्षा सूत्र के वचन की शक्ति है, जो स्वर्ग से पाताल तक की यात्रा करते हुए आज के युग में भी रिश्तों में विश्वास और वचन निभाने का संकल्प जगाता है।

उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि द्रौपदी द्वारा कृष्ण को राखी बांधने पर भगवान कृष्ण ने भी उसकी लाज रखी। इसलिए जीवन ऐसा हो जिसमें हम केवल जगत को प्रसन्न करने के बजाय जगतपति को प्रसन्न करने के लिए जिएं।

अनुभवों से जुड़ी कथा की आत्मीयता कथा के दौरान प्रशांत अग्रवाल ने संस्थान में उपचार और कृत्रिम अंग लगवाने आए महाराष्ट्र के सैयद अरबाज, राजस्थान के हुकमाराम, बिहार की राजनंदनी, छत्तीसगढ़ के सचिन और उत्तर प्रदेश के अभिनव से संवाद कर उनके अनुभव जाने। उन्होंने संस्थान में सामूहिक विवाह के बाद दांपत्य जीवन जी रहे देवेन्द्र और निकिता से भी बातचीत की और उनके जीवन में आए बदलावों के बारे में जाना।

समापन अवसर पर प्रशांत अग्रवाल ने विश्व मंगल की कामना करते हुए सभी से रक्षाबंधन पर्व को केवल रस्म तक सीमित न रखकर प्रेम, सुरक्षा, सेवा, विश्वास और वचन निभाने की भावना के साथ सार्थक बनाने की अपील की।