उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में शुक्रवार को नियमित प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि जीवन में मिलने वाले अवसरों का सदुपयोग करना चाहिए।
परमात्मा का सान्निध्य मिलने के बाद भी यदि व्यक्ति आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे नहीं बढ़ता, तो वह स्वर्णिम अवसर खो देता है।
प्रकृति द्वारा दिया गया अवसर बार-बार नहीं मिलता।साध्वी श्रीजी ने कहा कि जिस प्रकार कुम्हार कच्ची मिट्टी को आकार देता है, उसी प्रकार गुरु भगवंत अपने मार्गदर्शन से जीवन को संस्कारित करते हैं।
वियोग में भी स्मरण का आनंद है और अभाव से ही संयोग की अनुभूति होती है।उन्होंने कहा कि परिवार जीवन की प्रेरणा है। प्रेम, मर्यादा और आपसी समझ से रिश्ते दूध में शक्कर की तरह घुल-मिल जाते हैं, जबकि छोटी-छोटी बातों पर विवाद रिश्तों में दूरियां बढ़ाते हैं।
हमारी जिव्हा पर ही विष और अमृत दोनों का वास है। इसलिए वाणी ऐसी होनी चाहिए, जो दूसरों के जीवन में मिठास घोले और परिवार में सुख-शांति बनाए रखे।
इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्तिमय गीत प्रस्तुत किया।-------------------------------------------------------