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स्वच्छ शौचालय की समस्या बनी महिलाओं के लिए मुसीबत

साफ, सुरक्षित शौचालय के लिए मेवाड़ बचाओ मंच ने शुरू की नई मुहिम

मुख्य बिंदु
  • लेकसिटी दुनियाभर में अपनी सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध है लेकिन शहर के विकास, पर्यटन और आधुनिक सुविधाओं के बीच एक बुनियादी समस्या सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ, सुरक्षित और उपयोग योग्य शौचालयों की कमी, आज भी महिलाओं के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है ।
  • इसी समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए मेवाड़ बचाओ मंच ने एक नई सामाजिक मुहिम शुरू की है।
  • मंच की ओर से उदयपुर के अलग-अलग सार्वजनिक स्थानों पर जाकर शौचालयों की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जा रहा है और उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग कर प्रशासन तक समस्या पहुंचाने तथा समाधान के लिए प्रयास किया जा रहा है।
  • मंच की ओर से पूर्व में उदयपुर का पैसा उदयपुर में, उदयपुर ने ठाना है साइबर क्राइम को हराना जैसे सफल अभियान संचालन किया जा चुका है।
  • मंच संस्थापक अभिषेक पाण्डेय का कहना है कि शहर में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए पर्याप्त संख्या में साफ, सुरक्षित और इस्तेमाल योग्य सार्वजनिक शौचालय होना जरूरी है।
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स्वच्छ शौचालय की समस्या बनी महिलाओं के लिए मुसीबत

उदयपुर। लेकसिटी दुनियाभर में अपनी सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध है लेकिन शहर के विकास, पर्यटन और आधुनिक सुविधाओं के बीच एक बुनियादी समस्या सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ, सुरक्षित और उपयोग योग्य शौचालयों की कमी, आज भी महिलाओं के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है ।

इसी समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए मेवाड़ बचाओ मंच ने एक नई सामाजिक मुहिम शुरू की है।

मंच की ओर से उदयपुर के अलग-अलग सार्वजनिक स्थानों पर जाकर शौचालयों की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जा रहा है और उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग कर प्रशासन तक समस्या पहुंचाने तथा समाधान के लिए प्रयास किया जा रहा है।

मंच की ओर से पूर्व में उदयपुर का पैसा उदयपुर में, उदयपुर ने ठाना है साइबर क्राइम को हराना जैसे सफल अभियान संचालन किया जा चुका है।

मंच संस्थापक अभिषेक पाण्डेय का कहना है कि शहर में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए पर्याप्त संख्या में साफ, सुरक्षित और इस्तेमाल योग्य सार्वजनिक शौचालय होना जरूरी है।

विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह सुविधा बेहद महत्वपूर्ण है। खराब या अनुपयोगी शौचालयों के कारण लोगों को असुविधा के साथ-साथ कई बार शर्मिंदगी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

इस मुहिम के जरिए मेवाड़ बचाओ मंच ने प्रशासन से मांग की है कि सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई, रखरखाव और निगरानी सुनिश्चित की जाए।

मंच संस्थापक अभिषेक पाण्डेय का कहना है मेवाड़ बचाओ मंच अब केवल किसी एक मुद्दे को उठाने वाला संगठन नहीं, बल्कि सामाजिक समस्याओं को सामने लाकर उनके समाधान के लिए मजबूत भूमिका में नजर आ रहा है। मंच की इस नई पहल का उद्देश्य लोगों को यह समझाना भी है कि स्वच्छ और सुरक्षित सार्वजनिक शौचालय कोई विलासिता नहीं, बल्कि नागरिकों की बुनियादी जरूरत और सम्मान से जुड़ा विषय है।

मंच के अभिषेक पांडेय, निधि गुप्ता, विनती दोषी , चिराग मेघवाल, दीपेश शर्मा और डॉ. मधु नाहर के नेतृत्व में विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया जा रहा है।

टीम सार्वजनिक शौचालयों की सफाई, रखरखाव, सुरक्षा और उपयोग की स्थिति को करीब से देख रही है।

जहां व्यवस्था खराब मिल रही है, वहां उसकी वास्तविक स्थिति को वीडियो के माध्यम से रिकॉर्ड किया जा रहा है, ताकि समस्या केवल शिकायत तक सीमित न रहे, बल्कि जिम्मेदार विभागों के सामने ठोस प्रमाण के साथ रखी जा सके।

इस अभियान में डॉ. मधु नाहर स्वच्छता और स्वास्थ्य के बीच संबंध को भी लोगों के सामने रख रही हैं। उनका कहना है कि लंबे समय तक गंदे और अस्वच्छ शौचालयों का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

खासकर महिलाओं के लिए सार्वजनिक शौचालयों की स्वच्छता और सुरक्षा का सीधा संबंध उनके स्वास्थ्य, सुविधा और सम्मान से है। इसलिए इस विषय को केवल सफाई का मुद्दा मानने के बजाय इसे महिला स्वास्थ्य और गरिमा का सवाल भी माना जाना चाहिए।

मेवाड़ बचाओ मंच की यह पहल उसकी पूर्व सामाजिक पहलों की निरंतरता के रूप में भी देखी जा रही है। मंच पहले भी स्थानीय समस्याओं को उठाकर प्रशासन और संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित करता रहा है।

इस बार रक्षाबंधन के अवसर पर ‘महिलाओं का नारा, साफ सुरक्षित शौचालय, हक है हमारा’ जैसे संदेश के साथ अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

अभियान के पोस्टर में नागरिकों से अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी सार्वजनिक स्थान पर शौचालय की खराब स्थिति दिखाई दे तो उसकी सूचना मंच तक पहुंचाएं।

अभियान की खास बात यह है कि मंच केवल सवाल उठाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि समस्या की जमीनी तस्वीर सामने लाकर समाधान की दिशा में प्रशासन को सक्रिय करने का प्रयास कर रहा है। यदि नागरिक भी ऐसी समस्याओं की जानकारी साझा करें और जिम्मेदार विभाग समय पर कार्रवाई करें, तो यह छोटी-सी पहल शहर की बड़ी जरूरत को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।