उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान के सेवातीर्थ स्थित वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी में आयोजित ‘अपनों से अपनी बात’ कार्यक्रम में संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने गौवत्स द्वादशी के अवसर पर गाय से जुड़े प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से सेवा, सत्य, समर्पण और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय केवल पूजनीय नहीं, बल्कि करुणा, त्याग और जीवन मूल्यों की प्रतीक भी रही है।
अग्रवाल ने राजा दिलीप और नंदिनी गाय का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में राजा दिलीप ने 21 दिनों तक नंदिनी की सेवा की और उसकी रक्षा के लिए अपने प्राण तक अर्पित करने को तत्पर हो गए। उनकी निष्ठा से प्रसन्न होकर नंदिनी ने उन्हें पुत्र रघु का आशीर्वाद दिया।
इसी क्रम में पुण्यकोटि गाय की कथा के माध्यम से सत्य और वचनबद्धता का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि बछड़े को दूध पिलाकर लौटने का वचन देने वाली गाय बाघ के पास वापस पहुंच गई। उसकी सत्यनिष्ठा से प्रभावित होकर बाघ का हृदय परिवर्तन हो गया। यह प्रसंग सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य को अपने वचन और मूल्यों से विमुख नहीं होना चाहिए।
उन्होंने महर्षि वशिष्ठ और कामधेनु तथा राजा पृथु और पृथ्वी से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण और जीवमात्र के प्रति संवेदना का संदेश दिया। अग्रवाल ने कहा कि समाज की वास्तविक समृद्धि केवल आर्थिक उन्नति से नहीं, बल्कि कर्तव्यबोध, नैतिक मूल्यों और परस्पर समर्पण से संभव है।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान से लाभान्वित दिव्यांगजनों से संवाद किया गया। समापन अवसर पर सैकड़ों की संख्या में लाभार्थी एवं अन्य जन उपस्थित रहे।
