उदयपुर। देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने प्रमाद (आलस्य) को पतन और उद्यम (परिश्रम) को विकास का मूल कारण बताया।
उन्होंने कहा कि आलसी व्यक्ति केवल योजनाएं और कल्पनाएं ही बुनता रह जाता है, जबकि उद्यमी व्यक्ति अपने पुरुषार्थ से कार्यों को धरातल पर साकार कर दिखाता है।
संसार में जिस किसी ने भी सफलता हासिल की है, वह केवल उद्यम और पुरुषार्थ के बल पर ही की है।
डॉ. मुनि ने प्रेरणा देते हुए कहा कि छोटे-छोटे जीव-जंतु भी दिनभर परिश्रम कर अपना लक्ष्य साध लेते हैं, जबकि मनुष्य के पास विवेक, बुद्धि और समस्त साधन होते हुए भी वह आलस्यवश उनका सही उपयोग नहीं कर पाता।
सभा में श्रमणसंघीय प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने उत्तराध्ययन शास्त्र के स्वाध्याय के माध्यम से भगवान महावीर के उपदेशों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अत्यंत अनमोल है, इसे व्यर्थ गंवाने के बजाय सार्थक कार्यों में लगाएं।
अटूट हौसले, पुरुषार्थ और लगन से मनुष्य असंभव कार्य को भी संभव कर दिखाता है। उन्होंने कहा कि आलस्य नरक का द्वार है तो पुरुषार्थ स्वर्ग का मार्ग प्रशस्त करता है।
बिस्तर पर केवल लेटे-लेटे सोचने से कोई भी कार्य पूर्ण नहीं होता। भगवान महावीर ने उद्घोष किया थाकृ“उठो, प्रमाद का त्याग करो और धर्म-कर्म में तनिक भी विलंब मत करो।” विद्या, धन और यश सब अप्रमाद (परिश्रम) से ही संभव हैं।
पिता की कमाई पर आश्रित रहने के बजाय स्वयं के पुरुषार्थ पर विश्वास रखें। कर्मयोगी ही अंततः परमात्मा पद को प्राप्त करता है; पुरुषार्थ के बल पर ही निर्धन भी धनी बनता है और एक साधारण पृष्ठभूमि का व्यक्ति भी देश का नेतृत्व कर प्रधानमंत्री पद तक पहुंचता है।
पुरुषार्थ मनुष्य के इहलोक और परलोक दोनों को संवारता है।
श्रावक संघ के अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन एवं महामंत्री हिम्मत बडाला ने बताया कि 6 अक्टूबर धन तेरस को प्रातःआचार्य देवेंद्र समाधि स्थल पर 8 बजे सामूहिक जाप एवं प्रातः 8.45 बजे से श्रीमद् उत्तराध्ययन शास्त्र पर विशेष प्रवचन का आयोजन किया जाएगा।
