उदयपुर। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पूजनीया रासेश्वरी देवी के सान्निध्य में जस्टाना राजपुताना रिजॉर्ट, हिरण मगरी में भव्य जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया। सायं 6 बजे से प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में उदयपुर के श्री कृष्ण अनुरागी श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भजन कंसर्ट से हुआ। मधुर भजनों और हरिनाम संकीर्तन से पूरा वातावरण कृष्ण भक्ति में सराबोर हो गया। उपस्थित भक्तजन भी भजनों में स्वर मिलाते हुए भक्ति भाव में डूब गए और पूरा परिसर हरिनाम के जयघोष से गूंज उठा।
इसके पश्चात पूजनीया रासेश्वरी देवी ने श्री कृष्ण तत्त्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि श्री कृष्ण कौन हैं और हमारा उनसे क्या संबंध है। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण अनंत गुणों से युक्त होने के साथ-साथ दिव्य विरोधाभासों की खान हैं। वेद उन्हें अजन्मा कहते हैं, फिर भी वे अवतार लेकर इस धरती पर प्रकट होते हैं। जो आत्माराम और पूर्ण हैं तथा समस्त सांसारिक कामनाओं से परे हैं, वही भगवान ब्रज में मुट्ठी भर छाछ के लिए गोपियों के इशारों पर नृत्य करते हैं। जो पूर्णतः स्वतंत्र हैं, वे अपने भक्त के प्रेम से बंध जाते हैं। रासेश्वरी देवी ने ऐसे अनेक गूढ़ आध्यात्मिक सिद्धांतों को सरल और सहज रूप में भक्तों के समक्ष प्रस्तुत किया।
इसके बाद दिव्य रासलीला की मनोहारी प्रस्तुति हुई। श्री राधा-कृष्ण की मधुर रासलीला का सजीव दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा परिसर दिव्य आनंद से भर गया।
कार्यक्रम के अगले चरण में मंच पर भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य का भव्य दृश्य प्रस्तुत किया गया। संकीर्तन करते हुए श्रद्धालु मध्यरात्रि में भगवान के प्राकट्य की प्रतीक्षा करते रहे। जैसे ही बाल गोपाल का प्राकट्य हुआ, पूरा पंडाल ‘जय श्री कृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठा।
पूजनीया रासेश्वरी देवी ने बाल गोपाल का अभिषेक किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने नृत्य और संकीर्तन के साथ हर्षोल्लासपूर्वक जन्माष्टमी उत्सव मनाया। भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक आनंद से परिपूर्ण यह आयोजन प्रसाद वितरण के साथ सम्पन्न हुआ।
