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जलन

Dr Prerna Gaur

मुख्य बिंदु
  • अनामिका पढ़ाई में बहुत होशियार थी।
  • अपनी मेहनत और लगन के बल पर आखिरकार उसका चयन एक प्रतिष्ठित बैंक में हो गया।
  • नौकरी मिलने की खुशी उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी।
  • पढ़ाई के माहौल से निकलकर नौकरी की दुनिया में कदम रखना उसके लिए एक नए सफर की शुरुआत थी।
  • ऑफिस में वह लगभग सभी के लिए अनजान थी।
  • उसे नहीं पता था कि मुस्कुराते चेहरों के पीछे कुछ लोगों के मन में उसके लिए ईर्ष्या भी पल रही है।
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जलन

अनामिका पढ़ाई में बहुत होशियार थी। अपनी मेहनत और लगन के बल पर आखिरकार उसका चयन एक प्रतिष्ठित बैंक में हो गया। नौकरी मिलने की खुशी उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी। पढ़ाई के माहौल से निकलकर नौकरी की दुनिया में कदम रखना उसके लिए एक नए सफर की शुरुआत थी।

ऑफिस में वह लगभग सभी के लिए अनजान थी। उसे नहीं पता था कि मुस्कुराते चेहरों के पीछे कुछ लोगों के मन में उसके लिए ईर्ष्या भी पल रही है। अनामिका का स्वभाव सरल था। वह हर किसी से प्रेमपूर्वक बात करती और अपनी क्षमता के अनुसार दूसरों की मदद करती। धीरे-धीरे ऑफिस के अधिकांश लोग उसे पसंद करने लगे।

लेकिन रुचिका को अनामिका की बढ़ती लोकप्रियता बिल्कुल पसंद नहीं थी।

वह छोटी-छोटी बातों पर अनामिका को परेशान करने लगी। एक दिन बॉस आशुतोष द्वारा दिए गए कुछ जरूरी कागज लेकर वह अनामिका के पास पहुँची।

“अनामिका, ये कागज कल तक सर को दे देना। मैं तुम्हें मेल कर दूँगी कि इन्हें कैसे तैयार करना है।”

अनामिका ने भरोसे से कागज ले लिए। शाम को ऑफिस का काम खत्म करके वह घर पहुँची। रात में उसने रुचिका का मेल खोला और उसमें दी गई जानकारी के अनुसार पूरी मेहनत से कागज तैयार कर दिए।

अगली सुबह वह आत्मविश्वास के साथ कागज लेकर बॉस के पास पहुँची।

आशुतोष ने कागज देखते ही गुस्सा होते हुए कहा “अनामिका! तुमने सारा काम गलत कर दिया है। तुम्हें काम करना भी नहीं आता!”

उन्होंने सारे कागज उसके सामने फेंक दिए। अनामिका घबरा गई। उसकी आँखों में निराशा उतर आई।

पास खड़ी रुचिका मन ही मन खुश हुई और बोली— “सर, मैंने तो आपको पहले ही कहा था कि अनामिका को कुछ भी नहीं आता। इसे कोई जरूरी काम देना ही नहीं चाहिए।”

आशुतोष कुछ क्षण चुप रहे। फिर अचानक उनके चेहरे का भाव बदल गया।

“बहुत बढ़िया, रुचिका! मैं यही देखना चाहता था कल रात तुमने अनामिका को जो मेल भेजा था, वह अनामिका ने मुझे भी �