बांसवाड़ा । जो कर्मयोगी फल की इच्छा के बिना, अपने-आप जो कुछ मिल जाय, उसमें सन्तुष्ट रहता है और जो ईर्ष्या से रहित, द्वन्द्वों से अतीत तथा सिद्धि और असिद्धि में सम है वह कर्म करते हुए भी उससे नहीं बँधता वही संत ओर कृष्ण भावनामृत भक्ति रखने वाला प्रेमी है।
यह कहना है वृन्दावन से पधारे ब्रम्हचारी आचार्य द्विज राज प्रभु का ।
वे आज शुक्रवार शाम को बाहुबली कॉलोनी स्थित साधिका श्रीमति रचना अरुण व्यास के निवास स्थान पर धार्मिक अनुष्ठान में बोल रहे थे।
*ममत्व, स्वामित्व और आसक्ति के भाव को छोड़कर भारमुक्त हो जायें* उन्होंने कहा कि मनुष्य सब कुछ यहीं एकत्रित करता है और सब कुछ यहीं छोड़कर सहसा चला जाता हैं।
यदि सब कुछ छूटना है तो हम उसे स्वयं ही छोड़ दें अर्थात् उसके ममत्व, स्वामित्व और आसक्ति के भाव को छोड़कर भारमुक्त हो जायें।
सब धन परमात्मा का ही है। अतः 'इदं न मम' यह मेरा नहीं है की भावना को शिरोधार्य करके धन का उपभोग एवं सदुपयोग करना सब प्रकार से श्रेष्ठ है।
*निश्चय ही आत्मज्ञान की अपेक्षा धन अत्यन्त तुच्छ* उन्होंने बृहदारण्यक उपनिषद् के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि मैत्रेयी ने याज्ञवल्क्य ऋषि से पूछा, यदि यह धन से सम्पन्न सारी पृथ्वी मेरी हो जाये तो क्या मैं अमर हो सकती हूँ?
तब याज्ञवल्क्य ने कहा,भोग-सामग्रियों से सम्पन्न मनुष्यों का जैसा जीवन होता है, वैसा ही तेरा जीवन भी हो जायेगा। धन से अमृतत्व की तो आशा ही नहीं।
*अमृतत्वस्य नाशास्ति वित्तेन।* मैत्रेयी ने कहा जिससे मैं अमृता नहीं हो सकती, उसे लेकर क्या करूँगी? मुझे तो अमृतत्व का साधन बतलायें प्रारम्भ में आचार्य अभय गौरांग दास एवम् अभिनंदन निमाई दास ने विश्व भगवतम् पखवाड़े का आव्हान करते हुए कहा कि *येनाहं नामृतास्यां किमहं तेन कुर्याम्?* *यदेव भगवान्वेद तदेव मे ब्रूहि।* जीवन का उद्देश्य तो अमृत स्वरूप आत्मा को जानकर अमृतत्व प्राप्त करना है।
उपनिषदों में अनेक स्थलों पर अमृतत्व की चर्चा है। जीवन काल में आत्मतत्त्व को जानकर अमृतत्व प्राप्त करना ही उत्तम धन है।
यही मानव की सर्वोच्च उपलब्धि भी है। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान में प्रारम्भ में तुलसी नृसिंह कवच आरती अभिषेक पूजा विधान श्रीमति रचना व्यास एवम् चरण वंदना दासी ने किया।
कृष्ण प्रेमी सत्संग संकीर्तन भजन में आचार्य अभिनन्दन निमाई दास की अगुवाई में साधक साधिकाओं श्रद्धालुओं द्वारा जोश खराश से भाव विभोर होकर सुगंधित द्रव्यों पंच गव्य अबीर गुलाल इत्र दूध दही शहद सहित गंगाजल से राधा श्याम सुन्दर का स्वागत अभिषेक किया ।
इस अवसर पर समारोह में कृपाली भट्ट , हिमानी,कुशल डिम्पल, सुनील, सुरेश, नैमिष अक्षी शाबुनी मंडल, दीपिका, विभा, अर्चना, अनिता, भारती, चैतन्य, खुशी त्रिवेदी, सुशीला ,नीरज पाठक, कुशल पुनीत , वारिस सहित कई साधक साधिकाएं श्रद्धालु शामिल थे।
