अमृतत्व प्राप्त करना ही उत्तम धन:- द्विज राज प्रभु
बांसवाड़ा । जो कर्मयोगी फल की इच्छा के बिना, अपने-आप जो कुछ मिल जाय, उसमें सन्तुष्ट रहता है और जो ईर्ष्या से रहित, द्वन्द्वों से अतीत तथा सिद्धि और असिद्धि में…
“अमृतत्व” के परिणाम
बांसवाड़ा । जो कर्मयोगी फल की इच्छा के बिना, अपने-आप जो कुछ मिल जाय, उसमें सन्तुष्ट रहता है और जो ईर्ष्या से रहित, द्वन्द्वों से अतीत तथा सिद्धि और असिद्धि में…