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भोजन का अधिकार, मौलिक मानवाधिकार’’सचिव ललित पुरोहित

जैसलमेर। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के एक्शन प्लान वर्ष 2026 में अक्टूबर माह के कार्यक्रमों के निर्देशानुसार सात दिवसीय

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भोजन का अधिकार, मौलिक मानवाधिकार’’सचिव ललित पुरोहित

जैसलमेर । राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के एक्शन प्लान वर्ष 2026 में अक्टूबर माह के कार्यक्रमों के निर्देशानुसार सात दिवसीय खाद्य सुरक्षा अभियान की श्रृंखला में अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश, जैसलमेर ओमी पुरोहित के निर्देशन में ‘‘’ ’विश्व खाद्य दिवस’ केे अवसर पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जैसलमेर ललित पुरोहित ने पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, मोहनगढ़, जैसलमेर पर खाद्य सुरक्षा विभाग के समन्वय से विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया।

शिविर में प्रधानाचार्य पवन कुमार बेनीवाल, खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. गणेशराम सुथार, डॉ. स्वरूप चारण, किशनाराम कड़वासरा, कीर्तिपाल सिंह उपस्थित रहे।

शिविर में उपस्थित विद्यार्थियों व शिक्षकों का संबोधन करते हुए सचिव ने कहा कि विश्व खाद्य दिवस, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन की स्थापना की याद में प्रत्येक वर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है।

उन्होंने बच्चों को खाद्य सुरक्षा का अर्थ स्थानीय भाषा में समझाते हुए बताया कि दुनिया के हर व्यक्ति को हर समय, अपनी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले।

खा़द्य सुरक्षा केवल अनाज के उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति तक भोजन की पहुँच और उसकी सामर्थ्य सुनिश्चित करने का काम है। इसके साथ ही केवल भोजन मिलना ही काफी नहीं है, बल्कि उस भोजन में आवश्यक विटामिन, प्रोटीन, मिनरल्स और संतुलित तत्व होने चाहिए।

कुपोषण और एनेमिया जैसी समस्याएं हमारे समाज के विकास में बहुत बड़ी बाधा हैं। जब तक हमारे देश का बच्चा-बच्चा और महिलाएँ पौष्टिक आहार से वंचित रहेंगी, तब तक एक सशक्त और स्वस्थ भारत का निर्माण संभव नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक संस्थान कन्शर्न वर्ल्डवाईड द्वारा जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स में शामिल 122 देशों में से भारत का स्थान 100वां है, जो कि अत्यंत शोचनीय विषय है।

शिविर को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बताया कि भोजन का अधिकार एक मौलिक मानवाधिकार है। हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए भोजन पाने का अधिकार है।

हमारी सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (छथ्ै।) के माध्यम से इसे कानूनी रूप देने का प्रयास किया है, ताकि कोई भी नागरिक भूखा न रहे।

उन्होंने आगे जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के सहयोग से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा संचालित अंत्योदय अन्न योजना के तहत् दिव्यांग, एकल महिलाएं, बुजुर्ग, भूमिहीन मजदूर और अत्यंत गरीब परिवार के लोगों को अंत्योदय राशन कार्ड जारी कर प्रति परिवार हर महीने रियायती/निःशुल्क राशन 35 किलो अनाज उपलब्ध कराया जाता है एवं राजस्थान सरकार द्वारा नगरीय निकायों में गरीबों और वंचित व्यक्तियों को श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना के तहत मात्र 8 रूपये में शुद्ध एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

इसके साथ ही उन्होंने बच्चों का भोजन की बर्बादी के महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि हम शादियों, पार्टियों और हमारे अपने घरों में रोजाना टन भोजन कचरे के डिब्बे में फेंक देते है, इस तरह से की गई भोजन की बर्बादी केवल अन्न का अपमान नहीं है, बल्कि यह उन किसानों के कड़े परिश्रम और उन प्राकृतिक संसाधनों (जल, मिट्टी, ऊर्जा) का भी अपमान है जो इसे उगाने में खर्च हुए हैं।

भोजन की बर्बादी रोकना, हम सबकी सामूहिक व व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।

उन्होंने बच्चों को खाद्य सुरक्षा की शुरूआत हमारे अपने घर व अपनी थाली से होने की सीख देते हुए, बच्चों को संकल्प दिलवाएं कि ‘‘वे कभी भी अपनी थाली में भोजन व्यर्थ नहीं करेंगे, वे आवश्यकता से अधिक भोजन होने पर उसे जरूरतमंदों तक पहुँचाएंगे और वे पर्यावरण-अनुकूल और पौष्टिक आहार-शैली को अपनाएंगे।’’

शिविर समाप्ति पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी किशनाराम कड़वासरा ने वर्ष 2026 के विश्व खाद्य दिवस की थीम ‘’’ ‘आज नवाचार करें, कल का पोषण करें’’ की महत्ता के बारे में बताते हुए बच्चों को सतत् खाद्य पद्धतियों के बारे में अवगत करवाते हुए जानकारी दी कि हमें वर्तमान और भविष्य में खेती और भोजन उत्पादन इस तरीके से करना चाहिए कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी मिट्टी और पर्यावरण सुरक्षित रहें।

इस लक्ष्य को पाने के लिए हमें जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा, स्थानीय और मौसमी पदार्थाें के सेवन पर जोर देना होगा एवं मोटे अनाजों (श्री अन्न) जैसे बाजरा, ज्वार, रागी को अपने दैनिक आहार का हिस्सा बनाना होगा, जो कम पानी में उगते हैं और अत्यधिक पौष्टिक होते हैं।

इसके साथ ही उन्होंने शिविर में उपस्थित विद्यार्थियों व शिक्षकगण को जरिये चलचित्र डिब्बाबंद पदार्थ खरीदते समय खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य की दृष्टि से ध्यान रखने योग्य जरूरी तथ्यों के बारे में जानकारी दी, जिसके तहत् पैकेट पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण का लोगो और 14 अंको का लाइसेंस नंबर होना अनिवार्य है।

पैकेट पर लिखी एक्सपायरी डेट और बेस्ट बिफोर डेट का ध्यान रखें व अगर पैकेट पर तारीख मिटाई गई हो, ओवरराइट की गई हो या स्टिकर के ऊपर स्टिकर लगा हो, तो उसे न खरीदें।

अगर नमकीन, वेफर्स या स्त्रेक्स का पैकेट फूला हुआ न हो (हवा निकली हो) या पैकेट में छेद/लीकेज हो, तो उसमें नमी या बैक्टीरिया आ सकते हैं। डिब्बों पर लगा हरा बिंदु उसके शाकाहारी होने व भूरा/लाल बिंदु उसके मांसाहारी होने को प्रमाण होता है।

यदि आपके परिवार में किसी को मूंगफली, सोया, दूध, ग्लूटेन (गेहूं) या नट्स से एलर्जी है, तो पैकेट पर दी गई ^^Allergen Information** अवश्य पढ़े।

शिविर समाप्ति पश्चात् सचिव व खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा बच्चों को विद्यालय में मीड डे मील के तहत उपलब्ध करवाए जा रहे खाने को स्वयं बच्चों के साथ बैठकर खाकर परखा गया, जिसमें भोजन की गुणवत्ता संतोषप्रद व संतुलित आहार के मानकों के तहत पाई गई।